भारत मंडपम में BRICS के सदस्य देशों ने BRICS New Delhi Declaration 2026 को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया है (इमेज-Bharat Express)
BRICS Stand On Terrorism: नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय BRICS शिखर सम्मेलन में भारत को बड़ी कूटनीतिक कामयाबी मिली है. भारत मंडपम में BRICS के सदस्य देशों ने BRICS New Delhi Declaration 2026 को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया है.
करीब 45 पन्नों के इस घोषणापत्र में आतंकवाद को लेकर जिस तरह की भाषा इस्तेमाल की गई है, उसे भारत की लंबे समय से चली आ रही चिंताओं के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है.
सबसे खास बात ये है कि घोषणापत्र में पाकिस्तान का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया गया, लेकिन आतंकवाद के खिलाफ जो सख्त रुख अपनाया गया है, उसमें भारत की प्रमुख चिंताएं साफ तौर पर दिखाई देती हैं.
Swagatam BRICS leaders for the 2026 Summit. pic.twitter.com/SkmO9rV2Kf
— Narendra Modi (@narendramodi) September 12, 2026
पहलगाम आतंकी हमले की निंदा
घोषणापत्र में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई है. इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी और कई लोग घायल हुए थे.
BRICS देशों ने साफ कहा है कि आतंकवाद किसी भी उद्देश्य, किसी भी स्थान या किसी भी व्यक्ति द्वारा किया जाए, उसे किसी भी परिस्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता. ब्रिक्स देशों ने कहा है कि आतंकवाद के लिए कोई भी बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा.
घोषणापत्र में सिर्फ आतंकवादी हमलों की निंदा तक बात सीमित नहीं रही. इसमें सीमा-पार आतंकवाद, आतंकवाद की फंडिंग और आतंकियों को सुरक्षित पनाह देने के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जरूरत पर भी जोर दिया गया है.
सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ हो सख्त कार्रवाई
भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सीमा पार आतंकवाद, आतंकियों की फंडिंग और उन्हें सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करता रहा है. BRICS देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए.
घोषणापत्र में कहा गया,
हम आतंकवाद के किसी भी कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं और उसे आपराधिक तथा किसी भी स्थिति में अनुचित मानते हैं, चाहे उसके पीछे कोई भी उद्देश्य हो, वह कहीं भी और किसी के द्वारा भी किया गया हो. हम 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले की घोर निंदा करते हैं, जिसमें 26 लोगों की जान गई और कई अन्य घायल हुए. हम आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के खिलाफ लड़ाई जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं, जिसमें आतंकियों की सीमा-पार आवाजाही, आतंकवाद के वित्तपोषण और उन्हें सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराना शामिल है. हम दोहराते हैं कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए. आतंकवादी गतिविधियों में शामिल सभी लोगों और उनके समर्थकों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए.
BRICS देशों ने आगे कहा कि आतंकवादी गतिविधियों में शामिल लोगों और उनके समर्थकों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जवाबदेह ठहराने के लिए न्याय के कटघरे में लाया जाए.
आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’
घोषणापत्र में आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में दोहरे मानदंडों को खारिज करने का भी आह्वान किया गया है. यानी एक तरफ आतंकवाद को किसी धर्म या समुदाय से जोड़ने से इनकार किया गया है, तो दूसरी तरफ आतंकवादियों और उनके मददगारों के खिलाफ कार्रवाई में किसी तरह के भेदभाव से भी बचने की बात कही गई है.
Business forum, bilateral meetings and more…all the action from Bharat Mandapam today. pic.twitter.com/vUhQZqTMBF
— Narendra Modi (@narendramodi) September 11, 2026
BRICS देशों ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित सभी आतंकियों और आतंकी संगठनों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई की मांग की है.
आपसी सहयोग मजबूत करने की प्रतिबद्धता
इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के तहत Comprehensive Convention on International Terrorism यानी CCIT को जल्द अंतिम रूप देने और अपनाने का आह्वान भी किया गया है.
घोषणापत्र में BRICS Counter-Terrorism Working Group और उसके पांच उपसमूहों के काम की भी सराहना की गई है और आतंकवाद के खिलाफ आपसी सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई गई है.
अब सवाल ये है कि जब पाकिस्तान का नाम घोषणापत्र में नहीं है, तो इसे भारत की कूटनीतिक जीत क्यों माना जा रहा है?
लंबे समय से आतंकवाद से जूझ रहा भारत
भारत ने जिस तरह लंबे समय से सीमा-पार आतंकवाद, टेरर फंडिंग और आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाया है, BRICS के इस घोषणापत्र में उन्हीं मुद्दों पर सामूहिक प्रतिबद्धता सामने आई है. यानी घोषणापत्र में नाम भले ही न लिया गया हो, लेकिन आतंकवाद के खिलाफ अपनाई गई सख्त भाषा भारत के रुख को मजबूती देती है. सबसे अहम बात-पहलगाम आतंकी हमले का BRICS घोषणापत्र में स्पष्ट उल्लेख.
इसे भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दुनिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के इस मंच ने जम्मू-कश्मीर में हुए उस आतंकी हमले की सामूहिक रूप से निंदा की है.
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BRICS सम्मेलन में सदस्य देशों ने आतंकवाद को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. उनका मानना है कि आतंकवाद का कोई औचित्य नहीं, आतंकवाद के लिए कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं और आतंकवाद के खिलाफ कोई दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिये. यही वजह है कि BRICS का ये घोषणापत्र भारत के लिए एक अहम कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है.
-भारत एक्सप्रेस
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