शाहिल/बीकानेर
बीकानेर के गौरव और वीर चक्र से सम्मानित ब्रिगेडियर जगमाल सिंह राठौड़ (Brigadier Jagmal Singh Rathore) का बुधवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. 88 वर्ष की आयु में उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा और पंचतत्व में विलीन हो गए.
मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने दी अंतिम विदाई
अंतिम संस्कार में उद्योग एवं वाणिज्य, आईटी एवं संचार तथा खेल मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ भी मौजूद रहे. वे ब्रिगेडियर राठौड़ के भतीजे हैं और उन्होंने अर्थी को कंधा देकर अपने चाचा को अंतिम विदाई दी. इस दौरान उन्होंने कहा कि ब्रिगेडियर जगमाल सिंह ने अपना जीवन देश की सेवा में समर्पित किया और उनका शौर्य हमेशा याद किया जाएगा.
आत्मनिर्भर भारत और रक्षा क्षेत्र पर विचार
पत्रकारों से बातचीत में मंत्री राठौड़ ने कहा कि भारत रक्षा क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है. उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीक के इस दौर में जरूरी है कि हथियार भारत में ही बने और उनका निर्यात भी हो. उन्होंने किशनगढ़ में स्थापित डिफेंस पार्क का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां कंपनियां आ चुकी हैं और युवा स्टार्टअप्स ड्रोन सहित नई तकनीकों पर काम कर रहे हैं.
जीवन परिचय और वीरता
ब्रिगेडियर जगमाल सिंह राठौड़ का जन्म 1938 में बीकानेर के गारबदेसर गांव में हुआ. सादुल स्कूल और डूंगर कॉलेज से शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे 1961 में भारतीय सेना में अधिकारी बने. 1971 के भारत-पाक युद्ध में उन्होंने बीकानेर सीमा पर अद्वितीय साहस दिखाया, जिसके लिए उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया गया.
सेना और समाज में योगदान
उन्होंने कश्मीर और मिजोरम सहित कई अभियानों में अहम भूमिका निभाई और गंगा रिसाला के कमांडर भी रहे. सेवानिवृत्ति के बाद वे समाजसेवा और साहित्य में सक्रिय रहे.
प्रदेश में शोक की लहर
उनके निधन से बीकानेर सहित पूरे राजस्थान में शोक की लहर है. विभिन्न वर्गों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया.
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-भारत एक्सप्रेस
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