मायावती ने बदला गेम प्लान?
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इस बार अलग तस्वीर देखने को मिली. मायावती मंच पर मौजूद थीं, उनके साथ भाई आनंद कुमार बैठे थे और पहली बार उनके छोटे भतीजे ईशान आनंद भी आधिकारिक मंच पर नजर आए. वहीं, आकाश आनंद इस बैठक से दूर रहे. इससे पार्टी के भीतर नई अटकलें शुरू हो गईं कि क्या मायावती अब नई पीढ़ी के चेहरे को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं.
आकाश की राजनीतिक यात्रा
आकाश आनंद की राजनीति उतार-चढ़ाव से भरी रही है. दिसंबर 2023 में मायावती ने उन्हें नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाया और उत्तराधिकारी घोषित किया. इसके बाद उन्हें युवा चेहरा बताकर आगे बढ़ाया गया. लेकिन कुछ ही महीनों में समीकरण बदल गए. मई 2024 में जिम्मेदारियों से हटाया गया, फिर वापसी हुई, और मार्च 2025 में फिर किनारे कर दिए गए. 2026 में उन्होंने रैलियों के जरिए सक्रियता दिखाई, लेकिन अब मायावती ने साफ कर दिया है कि आकाश को फिलहाल बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी. उनके मुताबिक आकाश को अभी राजनीतिक परिपक्वता हासिल करनी है.
ईशान की पहली बड़ी मौजूदगी
आकाश के विपरीत ईशान आनंद की सक्रियता बढ़ती दिख रही है. लंदन की वेस्टमिंस्टर यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई करने वाले ईशान पहले भी कुछ कार्यक्रमों में नजर आए थे, लेकिन राष्ट्रीय कार्यकारिणी के मंच पर उनकी मौजूदगी को खास माना जा रहा है. नीला पटका पहने ईशान की तस्वीर ने बसपा की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है.
युवा विंग की जिम्मेदारी?
सूत्रों का कहना है कि मायावती पार्टी की युवा इकाई को लेकर बड़ा फैसला कर सकती हैं और इसकी जिम्मेदारी ईशान को दी जा सकती है. अगर ऐसा होता है तो यह उनकी औपचारिक राजनीतिक एंट्री होगी. हालांकि, इसे सीधे उत्तराधिकारी की तैयारी से जोड़ना अभी जल्दबाजी होगी.
मायावती का रुख
मायावती पहले ही कह चुकी हैं कि उनके जीते-जी कोई उत्तराधिकारी नहीं होगा. ऐसे में ईशान की मौजूदगी को उत्तराधिकारी बनाए जाने का संकेत मानना सही नहीं होगा. लेकिन बसपा की राजनीति में मायावती के हर कदम का राजनीतिक संदेश होता है. आकाश को दूर रखना और ईशान को मंच पर लाना पार्टी की रणनीति में बदलाव का संकेत माना जा रहा है.
चुनावी तैयारी का दौर
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. बसपा अपने संगठन को मजबूत करने और दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही है. साथ ही पार्टी की नजर युवा मतदाताओं पर भी है. ईशान की मौजूदगी को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
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फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि ईशान आनंद की यह एंट्री केवल युवा चेहरा आगे लाने की रणनीति है या मायावती की राजनीति में किसी बड़े बदलाव की शुरुआत. इसका जवाब आने वाले दिनों में बसपा के फैसलों से ही मिलेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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