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‘सिगरेट वाला रो रहा, बीड़ी वाला सो रहा’…. सिगरेट के दाम सुनकर अब कश नहीं, सिर्फ ठंडी आहें भर रहे हैं लोग; बीड़ी हुई ‘टैक्स फ्री’ जोन के करीब

बजट में सिगरेट पर GST बढ़कर 40% हुआ, जबकि बीड़ी पर घटाकर 18% किया गया है. सरकार का मकसद स्वास्थ्य के साथ लाखों कामगारों की रोज़ी-रोटी बचाना है.

हर साल की तरह इस बार भी बजट स्पीच खत्म होते ही सोशल मीडिया पर मीम्स की बौछार हो गई है. इस बार भी जैसे ही वित्त मंत्री ने अपनी स्पीच खत्म की, इंटरनेट पर मानों भावनाओं का सैलाब आ गया. लेकिन इस पूरे शोर-शराबे के बीच एक ऐसी बहस छिड़ गई है जिसने धुआं कर रखा है. मामला सिगरेट और बीड़ी के बीच के उस अंतर का है, जिसने आम आदमी को सोचने पर मजबूर कर दिया है.

सोशल मीडिया पर लोग सरकार से एक ही सवाल पूछ रहे हैं— “भाई, ये कैसा इंसाफ है?” दरअसल, सरकार ने सिगरेट और तंबाकू जैसे प्रोडक्ट्स पर जीएसटी (GST) बढ़ाकर सीधे 40% कर दिया है. यानी अब कश लगाना आपकी जेब पर काफी भारी पड़ने वाला है. लेकिन वहीं दूसरी तरफ, बीड़ी के शौकीनों के लिए अच्छी खबर आ गई. सरकार ने ना सिर्फ बीड़ी पर जीएसटी घटाकर 18% कर दिया, बल्कि इसे बनाने में इस्तेमाल होने वाले ‘तेंदू पत्ते’ पर भी टैक्स की कैंची चला दी है.

तेंदू पत्ते पर अब 18% की जगह सिर्फ 5% जीएसटी लगेगा. साफ़ है कि सिगरेट महंगी होगी और बीड़ी सस्ती.

इंटरनेट पर छिड़ा ‘मीम-युद्ध’

जैसे ही ये खबर फैली, मीमर्स एक्टिव हो गए. कोई सिगरेट पीने वालों की खाली जेब का दुख मना रहा है, तो कोई बीड़ी पीने वालों की ‘लॉटरी’ लगने पर मजे ले रहा है. लोग पूछ रहे हैं कि क्या सरकार को लगता है कि सिगरेट फेफड़ों के लिए ज्यादा बुरी है और बीड़ी सेहत के लिए अच्छी? सोशल मीडिया पर एक वर्ग काफी नाराज है कि सेहत के नाम पर सिर्फ एक ही तरफ सख्ती क्यों दिखाई जा रही है.

आखिर सरकार ने ऐसा क्यों किया?

अगर हम गहराई से देखें, तो यह फैसला सिर्फ सेहत से नहीं बल्कि लाखों लोगों की रोजी-रोटी से जुड़ा है. बीड़ी उद्योग भारत का एक बहुत बड़ा घरेलू सेक्टर है. ट्रेड यूनियनों की मानें तो इस काम में करीब 60 से 70 लाख लोग लगे हुए हैं, जिनमें सबसे ज्यादा संख्या महिलाओं की है. श्रम मंत्रालय के आंकड़े भी कहते हैं कि 40 लाख लोग तो सीधे तौर पर इससे घर चला रहे हैं.

सरकार का मकसद शायद यह है कि टैक्स का बोझ कम करके इस उद्योग को टूटने से बचाया जाए. अगर बीड़ी पर टैक्स ज्यादा होता, तो लाखों गरीब कामगारों के सामने बेरोजगारी का संकट खड़ा हो जाता. यानी सिगरेट पर सख्ती जहां राजस्व और सेहत को ध्यान में रखकर की गई है, वहीं बीड़ी पर राहत देने के पीछे ‘रोजगार बचाने’ का बड़ा सामाजिक कारण छिपा है.

ये भी पढ़ें: जब बजट भाषण में हुआ पीएम मोदी का जिक्र… जानें कब-कब वित्त मंत्री ने लिया नाम?

-भारत एक्सप्रेस



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