प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट को अल्पकालिक दस्तावेज नहीं, बल्कि दीर्घकालिक विकास की योजना बताया. उन्होंने टेक्नोलॉजी आधारित गवर्नेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश, वित्तीय सुधार और सभी हितधारकों की भागीदारी को विकसित भारत की दिशा में जरूरी बताया.
मोदी का बजट बाद वेबिनार में संबोधन
केंद्रीय बजट के बाद आयोजित वेबिनार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘विकसित भारत के लिए प्रौद्योगिकी, सुधार और वित्त’ विषय पर संबोधित करते हुए टेक्नोलॉजी आधारित शासन, दीर्घकालिक सुधारों और मजबूत वित्तीय ढांचे पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि बजट को अल्पकालिक नजरिए से नहीं, बल्कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के संदर्भ में देखना चाहिए.
2047 के लक्ष्य की ओर निरंतर यात्रा
प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय बजट कोई ‘शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग डॉक्यूमेंट’ नहीं, बल्कि व्यापक नीति रोडमैप है. इसकी सफलता का आकलन शेयर बाजार या टैक्स बदलाव से नहीं, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, क्रेडिट सुविधा, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और पारदर्शिता जैसे ठोस मानकों से होना चाहिए.उन्होंने स्पष्ट किया कि हर बजट राष्ट्र निर्माण की लंबी प्रक्रिया का एक चरण है. 2047 तक विकसित भारत बनाने के संकल्प के तहत हर सुधार और आवंटन को उसी दृष्टि से देखा जाना चाहिए. बजट के बाद होने वाले वेबिनार प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अहम मंच हैं.
इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश को बढ़ावा
प्रधानमंत्री ने एआई, ब्लॉकचेन और डेटा एनालिटिक्स के उपयोग से पारदर्शिता, जवाबदेही और गति बढ़ाने की बात कही. उन्होंने कहा कि सुधारों का मूल्यांकन घोषणाओं से नहीं, बल्कि जमीनी असर से होना चाहिए.उन्होंने बताया कि सार्वजनिक पूंजीगत व्यय 2 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है. सरकार के इस निवेश से निजी क्षेत्र को आगे आने का स्पष्ट संदेश मिला है. परियोजना स्वीकृति, लागत-लाभ विश्लेषण और लाइफ साइकल कॉस्टिंग पर भी जोर दिया गया.
बॉन्ड मार्केट और रिफॉर्म पार्टनरशिप
प्रधानमंत्री ने बॉन्ड बाजार को मजबूत करने, निवेशक-अनुकूल व्यवस्था बनाने और दीर्घकालिक वित्त को बढ़ावा देने की बात कही. अंत में उन्होंने सरकार, उद्योग और वित्तीय संस्थानों के बीच ‘रिफॉर्म पार्टनरशिप चार्टर’ की आवश्यकता बताई और बजट घोषणाओं को तेजी से जमीन पर उतारने का आह्वान किया.
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-भारत एक्सप्रेस
Written By: Shubhra Rai (Intern)
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