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बुंदेलखंड में चीतों की दहाड़! सागर के रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में छोड़े गए दो चीते, वन्य पर्यटन को मिलेगा नया पंख

MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सागर के रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीतों को खुले जंगल में छोड़ा. इसके साथ ही यह मध्यप्रदेश में चीतों का तीसरा आवास बन गया है. इस कदम से बुंदेलखंड में वन्यजीव पर्यटन और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे.

The roar of cheetahs echoed in Bundelkhand

बुंदेलखंड में गूंजी चीतों की दहाड़

रिपोर्ट- अजय भटनागर

MP News: मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए बुधवार का दिन ऐतिहासिक बन गया. सागर जिले में स्थित रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीतों को खुले जंगल में छोड़कर चीता पुनर्वास कार्यक्रम का नया अध्याय शुरू किया गया. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुनो राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए इन दोनों चीतों को प्राकृतिक आवास में छोड़ा. इस अवसर पर प्रदेश सरकार के मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, पूर्व मंत्री और वरिष्ठ भाजपा विधायक गोपाल भार्गव समेत कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे.

वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन दिवस पर हुई यह पहल सागर और पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. इससे क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण को नई पहचान मिलने की उम्मीद है.

मध्य प्रदेश में चीतों का तीसरा घर बना रानी दुर्गावती रिजर्व

कुनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधीसागर सेंचुरी के बाद अब रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व प्रदेश में चीतों का तीसरा स्थायी आवास बन गया है. नौरादेही के नाम से प्रसिद्ध यह क्षेत्र अब देश के चीता पुनर्स्थापना अभियान का अहम हिस्सा बन गया है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यहां चीतों की मौजूदगी से वन्यजीव पर्यटन को नई गति मिलेगी. इसके साथ ही बुंदेलखंड में पर्यटन से जुड़े कई नए अवसर भी पैदा होंगे, जिससे स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर लाभ मिलेगा.

पर्यटन के साथ बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

चीतों के आगमन का फायदा केवल वन्यजीव संरक्षण तक सीमित नहीं रहेगा. उम्मीद जताई जा रही है कि देशभर से बड़ी संख्या में पर्यटक इस क्षेत्र का रुख करेंगे. इससे होटल, रिजॉर्ट, होम-स्टे, ट्रांसपोर्ट, गाइड सेवा, वाहन संचालन और स्थानीय हस्तशिल्प कारोबार को बढ़ावा मिलेगा.

आसपास के गांवों में भी पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी. इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे.

चीतों के लिए बनाई गई विशेष व्यवस्था

चीतों को सुरक्षित वातावरण देने के लिए रिजर्व में व्यापक तैयारियां की गई हैं. कुल 439 हेक्टेयर क्षेत्र को उनके रहवास के अनुकूल विकसित किया गया है. चूंकि इस इलाके में बाघ भी पाए जाते हैं, इसलिए आधुनिक सुरक्षा सुविधाओं से लैस विशेष बोमा और अन्य व्यवस्थाएं तैयार की गई हैं.

वन विभाग ने चीतों की निगरानी, सुरक्षा और स्वास्थ्य देखभाल के लिए विशेष इंतजाम किए हैं. साथ ही दूसरे वन्यजीवों के लिए भी संतुलित और सुरक्षित पारिस्थितिकी तंत्र बनाए रखने पर जोर दिया गया है.

प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, जिसे नौरादेही टाइगर रिजर्व के नाम से भी जाना जाता है, सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में फैला हुआ है. इसका कुल क्षेत्रफल करीब 2,339 वर्ग किलोमीटर है.

वर्ष 1997 में स्थापित इस क्षेत्र को नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य के साथ एकीकृत करने के बाद 20 सितंबर 2023 को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला था. यहां बाघ, तेंदुआ, चीतल, सांभर, नीलगाय और भालू समेत कई वन्यजीव प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं. यह क्षेत्र संकटग्रस्त भारतीय गिद्ध प्रजातियों के संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है.

चीता परियोजना का लगातार बढ़ रहा दायरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को कुनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से लाए गए चीतों को छोड़कर भारत में चीता पुनर्स्थापना कार्यक्रम की शुरुआत की थी. बाद में दक्षिण अफ्रीका से भी चीते भारत लाए गए.

अब यह महत्वाकांक्षी परियोजना मध्य प्रदेश के अन्य उपयुक्त वन क्षेत्रों तक पहुंच रही है. रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों की रिहाई इसी विस्तार योजना की महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है.

देश में बढ़कर 60 हुई चीतों की संख्या

इसी महीने अक्टूबर 2026 में कुनो राष्ट्रीय उद्यान में भारत में जन्मी मादा चीता KJP21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया. इसके बाद देश में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 60 हो गई है. इनमें 41 चीते भारत में जन्मे हैं.

7 अक्टूबर को कुनो से नर चीता थोलो और मादा चीता CCB-3 को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व स्थानांतरित किया गया. इनके स्थानांतरण के बाद कुनो में 54 चीते रह गए हैं. वहीं गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में दक्षिण अफ्रीकी मूल के नर चीते प्रभास और पावक, मादा चीता धीरा तथा सितंबर 2026 में बोत्सवाना से लाई गई मादा चीता राधा पहले से मौजूद हैं.

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मुख्यमंत्री ने दी बुंदेलखंड को बधाई

रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीतों की सफल विमुक्ति के साथ मध्य प्रदेश का चीता पुनर्स्थापना अभियान अब नए चरण में पहुंच गया है. इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू हुई चीता परियोजना को याद करते हुए बुंदेलखंड और सागर क्षेत्र के लोगों को शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि यह पहल वन्यजीव संरक्षण, पर्यटन विकास और स्थानीय आर्थिक प्रगति के लिए मील का पत्थर साबित होगी.

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-भारत एक्सप्रेस



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