राजस्थान के नागौर जिले में स्थित प्रसिद्ध बुटाटी धाम इन दिनों श्रद्धा नहीं, बल्कि एक बड़े विवाद को लेकर चर्चा में है. करीब 500 साल पुराने श्री चतुरदास महाराज मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े दान, चढ़ावे और भामाशाहों के योगदान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट में करीब 22.74 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं का जिक्र किया गया है. रिपोर्ट सामने आने के बाद मंदिर विकास समिति पर आरोपों की बौछार हो गई है, वहीं समिति ने इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए जांच पर सवाल उठाए हैं.
जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार यादव को सौंपी गई 13 सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान करीब 15.16 करोड़ रुपये के खर्च और खातों में गंभीर गड़बड़ी पाई गई. वहीं, वर्ष 2025-26 के दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने के कारण करीब 7.58 करोड़ रुपये की राशि को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. इस तरह कुल मिलाकर 22.74 करोड़ रुपये की राशि जांच के घेरे में आई है.
जांच टीम ने मंदिर के सोने-चांदी के आभूषणों के रिकॉर्ड में भी कमी पाई है. रिपोर्ट के अनुसार करीब 36 किलो चांदी और 250 ग्राम सोने का पूरा हिसाब नहीं मिला. हालांकि नई समिति ने कुछ अलग आंकड़े पेश किए, लेकिन करीब 2.60 करोड़ रुपये मूल्य के आभूषणों का स्टॉक रजिस्टर और अन्य जरूरी दस्तावेज जांच के दौरान उपलब्ध नहीं कराए गए.
भामाशाहों के योगदान को लेकर भी उठा सवाल
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मंदिर परिसर में हुए कई निर्माण कार्यों का श्रेय समिति के खर्च के रूप में दिखाया गया, जबकि कुछ काम भामाशाहों ने अपने निजी खर्च से करवाए थे. भोजनशाला निर्माण में करीब 49.49 लाख रुपये समिति की ओर से दिखाए गए, लेकिन जांच में सामने आया कि ग्राउंड फ्लोर का निर्माण एक भामाशाह ने कराया था.
इसके अलावा रसोई खर्च, गोशाला मद, दान पेटी की आय-व्यय व्यवस्था, सीसीटीवी लगाने में हुए खर्च और कई भुगतान वाउचरों को लेकर भी जांच समिति ने सवाल उठाए हैं. रिपोर्ट में कुछ दस्तावेजों को संदिग्ध बताते हुए रिकॉर्ड की विस्तृत जांच और फॉरेंसिक ऑडिट की सिफारिश की गई है.
11 पदाधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश
जांच समिति ने मंदिर विकास समिति के तत्कालीन और वर्तमान 11 पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है. इनमें समिति अध्यक्ष देवेंद्र सिंह का नाम भी शामिल बताया गया है. आरोपों में धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, खातों में हेरफेर और साक्ष्य छिपाने जैसे मामले शामिल हैं.
रिपोर्ट में वर्तमान समिति को हटाकर किसी राजपत्रित अधिकारी को जिम्मेदारी देने, रिकॉर्ड सुरक्षित रखने, बैंक खातों पर रोक लगाने और आगे की जांच कराने जैसी सिफारिशें भी की गई हैं.
रिपोर्ट के बाद गरमाई राजनीति
मामला सामने आते ही राजस्थान की राजनीति भी तेज हो गई है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार और भाजपा-आरएसएस पर निशाना साधा. उन्होंने मंदिर से जुड़े मामले को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए इसे आस्था से जुड़ा गंभीर विषय बताया.
वहीं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता जरूरी है और आस्था से जुड़े मामलों में दोषियों को बचाया नहीं जाना चाहिए.
समिति ने आरोपों को बताया राजनीतिक साजिश
मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने जांच रिपोर्ट को खारिज करते हुए इसे एकतरफा कार्रवाई बताया है. उनका कहना है कि समिति ने जांच टीम को सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध करवाए थे, लेकिन उनका पक्ष सही तरीके से नहीं सुना गया. उन्होंने निष्पक्ष एजेंसी से दोबारा जांच कराने की मांग की है.
वहीं जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार यादव का कहना है कि समिति को पर्याप्त समय दिया गया था, लेकिन कई जरूरी रिकॉर्ड पेश नहीं किए गए. प्रशासन का दावा है कि जांच में सामने आई अनियमितताएं गंभीर हैं.
अब कोर्ट की प्रक्रिया पर टिकी नजर
फिलहाल मामला न्यायिक प्रक्रिया में है. उच्च न्यायालय के निर्देशों के चलते अभी कोई अंतिम कठोर कार्रवाई नहीं की गई है. जांच रिपोर्ट अब अदालत के सामने पेश होगी और आगे का फैसला न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा.
बुटाटी धाम का यह विवाद सिर्फ आर्थिक अनियमितताओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह आस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा बन चुका है. श्रद्धालु और स्थानीय लोग चाहते हैं कि सच सामने आए और मंदिर की व्यवस्था पूरी पारदर्शिता के साथ चले.
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