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‘उनका बलिदान…’, कारगिल के ‘शेरशाह’ कैप्टन विक्रम बत्रा को गृह मंत्री अमित शाह का नमन

कारगिल युद्ध के परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बत्रा के बलिदान दिवस पर गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी. अमित शाह ने कहा कि ‘शेरशाह’ का अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और सर्वोच्च बलिदान हर भारतीय को सदैव प्रेरित करता रहेगा…

Captain Vikram Batra Martyrdom Day: कारगिल युद्ध के महानायक और परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बत्रा के बलिदान दिवस के मौके पर पूरा देश आज उन्हें नमन कर रहा है. इसी कड़ी में केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर शहीद कैप्टन को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की है.

गृह मंत्री ने कारगिल के युद्ध में कैप्टन बत्रा के पराक्रम और अदम्य साहस को याद करते हुए उन्हें राष्ट्र का गौरव बताया. 7 जुलाई 1999 की वह तारीख आज भी हर हिंदुस्तानी के सीने में गर्व का अहसास जगाती है, जब देश के इस वीर सपूत ने दुश्मन के ठिकानों को तहस-नहस करते हुए अपनी मातृभूमि के लिए प्राणों की आहुति दे दी थी.

 

‘शेरशाह’ को नमन कर गृह मंत्री अमित शाह का संदेश

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने आधिकारिक संदेश में कहा कि कारगिल युद्ध के दौरान अपनी वीरता और अदम्य पराक्रम के बल पर रणनीतिक दृष्टि से बेहद दुर्गम और महत्वपूर्ण चोटी पर विजय पताका फहराने वाले कैप्टन विक्रम बत्रा का बलिदान अविस्मरणीय है. उन्होंने अपने संबोधन में आगे कहा कि परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बत्रा के अदम्य साहस, अटूट संकल्प और अप्रतिम शौर्य ने उन्हें ‘शेरशाह’ के रूप में अमर कर दिया है. उन्होंने देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि मातृभूमि के प्रति उनका यह सर्वोच्च बलिदान हर भारतीय को राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने और देश सेवा के लिए हमेशा प्रेरित करता रहेगा.

इतिहास की सबसे वीर गाथा(Captain Vikram Batra Martyrdom Day)

कैप्टन विक्रम बत्रा का नाम आते ही आज भी देश के युवाओं में एक अलग ऊर्जा का संचार होता है. कारगिल की चोटियों पर गूंजा ‘ये दिल मांगे मोर’ का उनका ऐतिहासिक नारा आज भी हर युवा के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है. कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने जिस तरह से ‘शेरशाह’ के कोड नेम से दुश्मन के ठिकानों पर एक के बाद एक सफल अभियान चलाए और अंतिम लड़ाई में अपनी जान की परवाह न करते हुए भारतीय सेना को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण सफलता दिलाई, उसकी मिसाल सैन्य इतिहास में बहुत कम मिलती है. 7 जुलाई 1999 को जब उन्होंने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया, तब उनकी उम्र बेहद कम थी, लेकिन उनका साहस दुनिया के बड़े से बड़े योद्धा से कहीं अधिक था.

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नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक

आज जब देश कारगिल विजय के गौरवशाली इतिहास को याद करता है, तो कैप्टन विक्रम बत्रा का चेहरा हर किसी की आंखों के सामने तैर जाता है. गृह मंत्री अमित शाह के इस संदेश ने एक बार फिर देश की नई पीढ़ी को यह याद दिलाया है कि आज हम जिस खुली हवा और सुरक्षित माहौल में सांस ले रहे हैं, उसके पीछे ऐसे ही वीर सपूतों का सर्वोच्च बलिदान है. कारगिल के इस परमवीर का जीवन, उनका संघर्ष, दुश्मनों के छक्के छुड़ा देने वाला उनका पराक्रम और उनकी ये पावन शहादत हमेशा-हमेशा के लिए भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज होकर अमर रहेगी.

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-भारत एक्सप्रेस



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