राउस एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने बैंक धोखाधड़ी मामले में तीन आरोपियों को 1 से 7 साल तक की सजा सुनाई है. इसमें निजी कंपनी मेसर्स इक्विपमेंट कंडक्टर एंड केबल्स लिमिटेड (ECCL) के तत्कालीन प्रबंध निदेशक श्री आलोक शर्मा, और नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन (NSIC) के तत्कालीन वरिष्ठ कार्यकारी निदेशक श्री मशकूर अहमद एवं कार्यकारी निदेशक श्री बी.एल. मल्होत्रा शामिल हैं. अदालत ने आरोपियों पर कुल 3.22 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसमें से 2 करोड़ रुपये एनएसआईसी को मुआवजे के रूप में दिए जाएंगे.
- श्री आलोक शर्मा, तत्कालीन प्रबंध निदेशक, ECCL को 7 साल के कठोर कारावास और 1.10 करोड़ रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई.
- श्री मशकूर अहमद और श्री बी.एल. मल्होत्र, दोनों एनएसआईसी के पूर्व अधिकारी, को 1 साल की सजा और 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया.
- अदालत ने ECCL पर 2.10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया, जिसमें से 2 करोड़ रुपये एनएसआईसी को मुआवजे के तौर पर दिए जाएंगे.
सीबीआई ने यह मामला 20 मार्च 2003 को श्री मशकूर अहमद, श्री आलोक शर्मा और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के आरोपों के तहत दर्ज किया था.
जांच में पाया गया कि ECCL, जो एक स्मॉल-स्केल इंडस्ट्रियल यूनिट (SSI) है, ने एनएसआईसी से रॉ मैटेरियल असिस्टेंस स्कीम और बिल डिस्काउंटिंग स्कीम के तहत धनराशि उधार ली थी. 1994 से 1999 के बीच, ECCL के तत्कालीन प्रबंध निदेशक श्री आलोक शर्मा ने एनएसआईसी के वरिष्ठ कार्यकारी निदेशक श्री मशकूर अहमद के साथ साजिश रचकर एनएसआईसी से धोखाधड़ी कर 5.90 करोड़ रुपये की क्रेडिट सीमा हासिल की.
ECCL ने सुरक्षा के लिए 1.10 करोड़ रुपये के शेयर गिरवी रखे, जो लॉक-इन पीरियड के कारण गैर-हस्तांतरणीय थे, और इस प्रकार, सुरक्षा के रूप में अमान्य थे. इसके अलावा, ECCL ने आंध्र प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (APSEB) और उत्तर प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (UPSEB) से संबंधित बिलों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया. ECCL ने APSEB और UPSEB के बकाया बिल क्रमशः 352.63 लाख रुपये और 138.47 लाख रुपये बताए, जबकि वास्तविक बकाया राशि या तो बहुत कम थी या थी ही नहीं.
ECCL ने पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग कर सीधे भुगतान हासिल किया और एनएसआईसी को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाया. 31 मार्च 2001 तक ECCL का एनएसआईसी पर बकाया 9.10 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
जांच के बाद सीबीआई ने 1 जुलाई 2005 को आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. अब अदालत ने इस मामले में दोषियों को सजा सुनाई है.
यह फैसला सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में सख्त कार्रवाई का उदाहरण है.
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-भारत एक्सप्रेस
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