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उत्तर रेलवे महाप्रबंधक की याचिका दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज किया

दिल्ली हाई कोर्ट ने उत्तर रेलवे महाप्रबंधक की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उपरोक्ता फोरम द्वारा एक उपभोक्ता को प्रदान करीब 6 लाख 25 हजार रुपये के मुआवजे के खिलाफ देरी से दायर अपील को अस्वीकार करने के निर्णय को चुनौती दी थी.

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Edited by Uma Sharma

दिल्ली हाई कोर्ट ने उत्तर रेलवे महाप्रबंधक की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उपरोक्ता फोरम द्वारा एक उपभोक्ता को प्रदान करीब 6 लाख 25 हजार रुपये के मुआवजे के खिलाफ देरी से दायर अपील को अस्वीकार करने के निर्णय को चुनौती दी थी. अदालत ने कहा रेलवे ने तय समय पर अपील दायर नहीं की और देरी से दायर अपील का कोई कारण नहीं बताया. दरअसल, शिकायतकर्ता हरलीन कौर परिवार के साथ एक ट्रेन से यात्रा कर रही थी, उसी दौरान एक अज्ञात व्यक्ति कोच में घुसा, शिकायतकर्ता का पर्स छीन लिया और चलती ट्रेन से कूद गया.

खुला छोड़ दिया कोच का दरवाजा

याची ने दावा किया कि टीटीई/रेलवे स्टाफ ने लापरवाही से कोच का दरवाजा खुला छोड़ दिया. इस प्रकार, रेलवे अधिकारियों द्वारा लापरवाही और सेवा में कमी थी क्योंकि यात्रियों के सामान की सुरक्षा के साथ-साथ सुरक्षित, संरक्षित और आरामदायक यात्रा प्रदान करना उनका कर्तव्य था. जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने शिकयत को उचित मानते हुए रेलवे को उचित सेवा प्रदान करने में असफल रहने पर उसे उपभोक्ता को 30 दिनों के भीतर 6,05,000 रुपये की राशि, 20,000 रुपये का मुआवजा/क्षतिपूर्ति और 5,000 रुपये की लागत का भुगतान करने का निर्देश दिया.

रेलवे अधिकारियों ने जिला आयोग के आदेश को चुनौती दी और देरी की माफी के लिए एक आवेदन दिया, लेकिन राज्य आयोग ने अपील को खारिज कर दिया. रेलवे अधिकारियों ने राष्ट्रीय आयोग के समक्ष एक पुनरीक्षण याचिका दायर की, लेकिन उसे भी आरोपित आदेश के तहत खारिज कर दिया गया. आखिर रेलवे ने उच्च न्यायालय में अपील दायर की. रेलवे ने कहा जिला आयोग का आदेश 12 जुलाई 2023 को पारित किया गया था और अपील 28-11-2023 को दायर की गई थी.

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रेलवे ने कहा उसे 25 अगस्त 2023 को प्राप्त हुआ था और राज्य आयोग के समक्ष दायर अपने आवेदन में किया था. सीमा की अवधि उपर्युक्त प्रमाणित प्रति की प्राप्ति की तारीख से शुरू हुई, यानी 25-08-2023, इस प्रकार अपील दायर करने में 64 दिनों की देरी हुई. उच्च न्यायालय ने कहा कि यह स्पष्ट था कि अपील निर्धारित समय अवधि से परे दायर की गई थी. रेलवे को 30 दिनों में अपील दायर करनी थी और हालांकि, राज्य आयोग 30 दिनों की समाप्ति के बाद भी अपील पर विचार कर सकता है, बशर्ते समय के भीतर इसे दायर न करने का पर्याप्त कारण दिखाया जाए. इस मामले में ऐसा कोई कारण नहीं है. ऐसे में रेलवे की अपील खारिज की जाती है.



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