केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने क्रिप्टोकरेंसी आधारित पोंजी स्कीम के मामले में सात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया है. इन आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 120B, 420 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66D के तहत मामला दर्ज किया गया है. आरोप है कि ये आरोपी विभिन्न साइबर अपराध मॉड्यूल चलाते हुए पोंजी और धोखाधड़ी स्कीम्स के माध्यम से निवेशकों से ऊंचे रिटर्न का वादा कर उन्हें ठग रहे थे.
7 राज्यों/UT में छापेमारी
CBI ने इस मामले में दिल्ली, झारखंड, पंजाब, मध्य प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु और राजस्थान समेत 7 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 10 स्थानों पर छापेमारी की. इस दौरान ₹34.2 लाख नकद, USD 38,414 (लगभग) की डिजिटल वर्चुअल संपत्तियां और बड़ी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए.
बरामद सामग्रियों में 7 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप, 1 टैबलेट, 3 हार्ड डिस्क, 10 पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड, सिम कार्ड, एटीएम/डेबिट कार्ड, ईमेल अकाउंट और अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज शामिल हैं. डिजिटल वर्चुअल एसेट्स को सुरक्षित रखते हुए जांच जारी है.
क्रिप्टोकरेंसी और बैंक खातों के माध्यम से ठगी
आरोपियों ने पोंजी स्कीम को बढ़ावा देने के लिए सोशल मीडिया समूहों का उपयोग किया. जांच में पता चला कि इन योजनाओं से प्राप्त अवैध धन को क्रिप्टोकरेंसी में बदला जा रहा था ताकि उनकी उत्पत्ति छिपाई जा सके.
आरोपियों के पास कई बैंक खाते और वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) वॉलेट थे, जो CoinDCX, WazirX, Zebpay और BitBns जैसे क्रिप्टो एक्सचेंजों से जुड़े थे. दो सालों के दौरान इन खातों और वॉलेट्स में ₹350 करोड़ से अधिक के लेन-देन हुए.
विभिन्न धोखाधड़ी के तरीके
पीड़ितों को ऑनलाइन लोन, ऑनलाइन लकी ऑर्डर, UPI फ्रॉड और इंटरनेट बैंकिंग धोखाधड़ी जैसे प्रलोभनों के माध्यम से ठगा गया. आरोपियों पर निवेशकों को गुमराह करने और झूठी जानकारी फैलाने का भी आरोप है.
CBI अब इन पोंजी स्कीम्स के जरिए ठगे गए धन के प्रवाह और आरोपियों के नेटवर्क का पता लगाने के लिए आगे की जांच कर रही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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