छत्तीसगढ़ के गांवों की महिलाएं जहां पहले सिर्फ घर की चारदीवारी तक सीमित रहती थीं, अब अपने हुनर और मेहनत से आत्मनिर्भर बन रही हैं. प्रधानमंत्री मोदी की लखपति दीदी योजना ने उन महिलाओं के जीवन को बदलने की दिशा में अहम कदम उठाया है. खासकर, सरगुजा जिले की महिलाएं अब अपने उत्पादों को न सिर्फ स्थानीय बाजार में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिला रही हैं.
सरगुजा जिले के गाँवों की महिलाएं अब व्यापार कर रही हैं और स्थानीय उत्पादों को बेहतर ब्रांडिंग और पैकेजिंग के जरिए बाजार में उतार रही हैं. इन महिलाओं का सपना अब केवल अपने परिवार का भरण-पोषण करने तक सीमित नहीं है. वे बड़ी-बड़ी कंपनियों से मुकाबला करने के लिए अपनी मेहनत और हुनर को इस कदर सवार रही हैं कि उनके उत्पाद अब वैश्विक बाजारों में भी बिकने के लायक हो गए हैं.
सरगुजा जिला प्रशासन ने इन महिलाओं के लिए एक खास कदम उठाया है. अब तक जो महिलाएं अपने उत्पादों को बेचने के लिए बाजार में कोई स्थाई जगह नहीं पा रही थीं, उन्हें अब एक बड़ा मौका मिला है. जिला प्रशासन ने महिलाओं के उत्पादों को आशा बिहान बाजार के नाम से एक खास आउटलेट में रखा है. यह बाजार अब शहर की दुकानों और ई-कॉमर्स वेबसाइट्स पर भी उपलब्ध है, जिससे इन उत्पादों की पहुंच और बढ़ गई है.
छत्तीसकला ब्रांड से जुड़ी नई पहचान
यहां बेचे जाने वाले सभी उत्पादों की ब्रांडिंग छत्तीसकला नाम से की गई है. इससे अब केवल सरगुजा या छत्तीसगढ़ के उत्पाद ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के गांवों की महिलाएं भी अपने उत्पादों को दूसरे जिलों और शहरों में बेच सकेंगी. यह एक नई शुरुआत है, जो महिलाओं के लिए उनके उत्पादों को एक पहचान दिला रही है.
संघर्ष से सफलता की एक मिसाल
इस बदलाव की एक तस्वीर हैं किशुन नगर गांव की रहने वाली आशा देवी की. आशा बताती हैं कि पहले उनके पास सामान बनाने का हुनर तो था, लेकिन उसे बेचने के लिए कोई पक्की जगह नहीं थी. नेशनल रूरल लाइवलीहुड मिशन (NRLM) और लखपति दीदी योजना के तहत उन्हें 5 लाख रुपये का लोन मिला. उन्होनें कहा कि,
“इस लोन ने हमारी जिंदगी बदल दी. हमने ‘आशा बिहान’ के नाम से अपनी दुकान खोली. आज हमारे पास मोरिंगा पाउडर, कच्ची घानी का शुद्ध सरसों तेल, खुशबूदार जीरा फूल चावल और तीखुर का आटा जैसे कई शुद्ध उत्पाद हैं, जो पूरी तरह से गांव की दीदियों द्वारा तैयार किए गए हैं.”
क्यों खास है ‘छत्तीसकला’?
सरगुजा जिला पंचायत के सीईओ विनय अग्रवाल का कहना है कि गांव की महिलाएं पहले भी कई उत्पाद बनाती थीं, लेकिन मार्केट में बिकने वाले फैंसी प्रोडक्ट्स के सामने उनकी पैकेजिंग फीकी पड़ जाती थी. इसी समस्या को खत्म करने के लिए प्रशासन ने ‘छत्तीसकला’ नाम से एक प्रॉपर प्लेटफार्म तैयार किया है. अब इन उत्पादों की क्वालिटी के साथ-साथ इनकी पैकेजिंग भी जबरदस्त है, जिससे ये बाजार में किसी भी बड़े ब्रांड को पछाड़ सकते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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