राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के मकराना थाना क्षेत्र से एक ऐसा सनसनीखेज और रोंगटे खड़े कर देने वाला अंतरराष्ट्रीय अपहरण और जबरन वसूली का मामला सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों से लेकर कानूनी गलियारों तक हड़कंप मचा दिया है. मकराना के बोरावड कस्बे के रहने वाले 26 वर्षीय युवक दीपक सोनी को नौकरी का झांसा देकर अफ्रीका के कांगो (किंशासा) शहर में बंधक बना लिया गया और उसकी जान के बदले हिंदुस्तान में बैठे परिजनों से 25,00,000 रुपये से भी अधिक की भारी-भरकम फिरौती वसूल ली गई.
पीड़ित परिवार का आरोप है कि मामले में कोर्ट के दखल के बाद मकराना थाने में संगीन धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज होने के बावजूद पुलिस की कार्रवाई अब तक पूरी तरह शून्य रही है, जिससे आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं. इस ढुलमुल रवैये पर अब न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए मकराना पुलिस को सख्त अल्टीमेटम दिया है और आगामी 15 तारीख तक अब तक की गई कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट तलब कर ली है.
नौकरी का झांसा देकर विदेश भेजा
अदालत में पेश पीड़ित के परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे अंतरराष्ट्रीय रैकेट का जाल अजमेर से बुना गया था. अजमेर निवासी मुख्य आरोपी विजय राखानी, जो स्टारलाइट टूर एंड ट्रैवल्स चलाता है, उसने बोरावड निवासी दीपक सोनी को विदेश में मोटी सैलरी वाली नौकरी दिलाने का लुभावना झांसा दिया था. आरोपियों के बहकावे में आकर पीड़ित परिवार ने ₹1,00,000 नकद दे दिए, जिसके बाद 6 मार्च 2026 को दीपक को डीआरसी (किंशासा) अफ्रीका की ‘STE GANIMOEX S.A’ कंपनी में भेज दिया गया. लेकिन वहां पहुंचते ही दीपक के पैर तले जमीन खिसक गई क्योंकि आरोपी विजय राखानी, राजेश पंजाबी, विजय पंजाबी, ओमप्रकाश और गजराज गौड़ ने एक सोची-समझी साजिश के तहत उसे एक सुनसान कमरे में जबरन बंधक बना लिया.
इसके बाद शुरू हुआ बर्बरता का वो दौर, जहां दीपक को लात, घूंसों और डंडों से बेरहमी से पीटा गया, कई दिनों तक भूखा-प्यासा रखा गया, उसका आईफोन छीन लिया गया और जान से मारने की धमकी देकर कई खाली कागजों व स्टांप पर जबरन हस्ताक्षर करवा लिए गए.
जान बचाने को मां ने बेचे सोने के जेवरात
कांगो में कैद दीपक ने किसी तरह हिम्मत जुटाकर 22 मार्च 2026 को मकराना पुलिस को एक ऑनलाइन शिकायत भेजी, लेकिन इसकी भनक लगते ही भारत में बैठे मुख्य आरोपी विजय राखानी ने बोरावड आकर पीड़ित के परिवार को खुलेआम धमकाना शुरू कर दिया. आरोपी ने अपनी ऊंची पहुंच का रौब झाड़ते हुए कहा कि पुलिस उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकती और अगर 2 दिन के भीतर 25,00,000 रुपये की फिरौती नहीं मिली, तो दीपक की लाश ही भारत आएगी. अपने लाडले की जान बचाने के लिए बेबस मां हीरामणी देवी ने आनन-फानन में अपने सोने के सारे जेवरात बेच दिए और ₹3,00,000 आरोपियों के बैंक खाते में ट्रांसफर किए.
इसके बाद 4 अप्रैल 2026 को दीपक के परिजन डरते-मरते अजमेर स्थित आरोपियों के निवास स्थान पहुंचे और वहां ₹21,00,000 की भारी-भरकम नकदी सौंपी, जिसका परिजनों ने चोरी-छिपे एक वीडियो भी बना लिया. यही नहीं, दरिंदगी की हद पार करते हुए आरोपियों ने पीड़ित की बहन ज्योति को भी डरा-धमकाकर 3 खाली ब्लैंक चेक पर जबरन साइन करवा लिए.
पैसे मिलते ही सुबह कराई फ्लाइट
इस पूरे सनसनीखेज मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब फिरौती की मोटी रकम और ब्लैंक चेक हाथ में आते ही आरोपियों ने पलटी मार दी और 6 अप्रैल 2026 को दीपक की भारत के लिए फ्लाइट करवा दी, जिसके बाद वह सकुशल घर लौट आया. आरोपियों ने खुद को बचाने के लिए यह मनगढ़ंत कहानी गढ़ी थी कि दीपक ने अफ्रीका की कंपनी में कोई बहुत बड़ा आर्थिक घपला किया है, जिसके एवज में यह पैसे लिए गए हैं. लेकिन कानूनी विशेषज्ञों और पीड़ित परिवार ने इस दावे पर गंभीर सवाल उठाए हैं कि यदि युवक ने वाकई विदेश में कोई घपला किया था, तो वहां की अदालतों या भारतीय दूतावास को इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई?
किसी निजी व्यक्ति ने कानून अपने हाथ में कैसे लिया और सबसे बड़ा सवाल यह कि अगर वाकई कोई बड़ा घोटाला था, तो रात को 25 लाख रुपये मिलते ही सुबह-सुबह उसकी फ्लाइट कैसे करवा दी गई? यह टाइमिंग साफ इशारा करती है कि यह कोई व्यापारिक विवाद नहीं बल्कि जबरन वसूली और अंतरराष्ट्रीय किडनैपिंग का एक संगठित रैकेट है.
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वायरल ऑडियो से खुली पोल
युवक के वतन लौटने के बाद पीड़ित परिवार ने 7 अप्रैल 2026 को मकराना थाना और 20 अप्रैल को जिला पुलिस अधीक्षक (SP) डीडवाना को सारे सबूतों और वीडियो के साथ लिखित रिपोर्ट दी थी. लेकिन रसूखदार आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कदम न उठाए जाने पर आखिरकार पीड़ित को अदालत की शरण लेनी पड़ी. न्यायालय के आदेश पर मकराना थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संगीन धाराओं के तहत मामला तो दर्ज कर लिया गया, लेकिन अब तक एक भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है जिससे पीड़ित परिवार गहरे खौफ में जीने को मजबूर है. इस बीच, आरोपियों की कई बेहद चौंकाने वाली ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सोशल मीडिया पर लीक हो गई हैं, जिसमें वे 25 लाख से भी ज्यादा की डिमांड करते सुने जा रहे हैं;
एक ऑडियो में आरोपी साफ कह रहा है कि 20 लाख अभी मिल गए हैं और बाकी के 15 लाख और देने होंगे. इस लीक ऑडियो और अब तक की ढीली कार्रवाई ने मकराना पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं कि आखिर इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय मामले में आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजने में इतनी देरी क्यों की जा रही है.
-भारत एक्सप्रेस
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