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अब संथाली भाषा में भी पढ़ा जा सकेगा भारत का संविधान; अमित शाह ने पीएम मोदी का जताया आभार

देश के इतिहास में पहली बार संविधान को संथाली भाषा और अलचिकि लिपि में प्रकाशित किया गया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे आदिवासी समुदाय और भारतीय भाषाओं के सम्मान की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया है.

देश के इतिहास में पहली बार संविधान को संथाली भाषा और उसकी अलचिकि लिपि में प्रकाशित किया गया है. इस फैसले के लिए केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है. अमित शाह ने इसे भारतीय भाषाओं के सम्मान की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया है.

आदिवासी समुदाय के लिए गर्व का क्षण

अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि संविधान का संथाली भाषा में आना पूरे देश के लिए गर्व की बात है. विशेष रूप से संथाली समुदाय के लिए यह एक बड़ा सम्मान है. अब संथाली समाज के लोग अपनी मातृभाषा में देश के कानून और अपने अधिकारों को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे. गृह मंत्री ने माना कि इससे आदिवासी समाज और लोकतंत्र के बीच का रिश्ता और मजबूत होगा.

संविधान को अलचिकि लिपि में छापने का मुख्य उद्देश्य इसे हर व्यक्ति तक पहुंचाना है. अमित शाह के अनुसार, जब लोग अपनी भाषा में संविधान को पढ़ेंगे, तो इसके आदर्श और मूल्य उनके दिल तक और भी स्पष्टता से पहुंचेंगे. यह कदम हमारे संविधान निर्माताओं के उस सपने को पूरा करने जैसा है, जिसमें उन्होंने चाहा था कि देश का हर नागरिक, चाहे वह किसी भी भाषा या समुदाय का हो, भारत के लोकतंत्र से जुड़ाव महसूस करे.

क्षेत्रीय भाषाओं को मिल रहा है बढ़ावा

केंद्र सरकार पिछले कुछ समय से स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं को सशक्त बनाने पर जोर दे रही है. अमित शाह ने अपनी पोस्ट में इस बात को दोहराया कि मोदी सरकार भारतीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है. संथाली भाषा में संविधान का प्रकाशन इसी कड़ी का एक हिस्सा है, जो आदिवासी संस्कृति और पहचान को नई ऊंचाई पर ले जाएगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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