Cyclone Ditva: तमिलनाडु और पुडुचेरी के तटीय इलाकों में इन दिनों चक्रवात ‘दित्वा’ का असर साफ दिखाई दे रहा है. समुद्र में हवाओं की करीब रफ्तार 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई है और लगातार तेज बारिश हो रही है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की माने तो यह चक्रवात फिलहाल श्रीलंका के तट के पास केंद्रित है और धीरे-धीरे उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ रहा है. चेन्नई से इसकी दूरी लगभग 500 किलोमीटर बताई जा रही है. विभाग का अनुमान है कि शनिवार आधी रात तक यह तमिलनाडु तट से करीब 60 किलोमीटर दूर होगा और रविवार सुबह तक पुडुचेरी के आसपास केंद्रित रहेगा. अधिकारियों का कहना है कि रविवार शाम तक इसकी तीव्रता बनी रह सकती है.
नमक उत्पादन पर भारी असर
नागपट्टिनम जिले के वेदारण्यम क्षेत्र में लगातार बारिश ने नमक कारोबार को गहरा नुकसान पहुंचाया है. करीब 9 हजार एकड़ में फैले नमक के खेत पानी में डूब गए हैं. अधिकारियों की माने तो इस साल सितंबर के अंत तक नमक उत्पादन पूरा हो चुका था लेकिन अचानक हुई बारिश ने भंडारण को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है. तैयार नमक पानी में घुल गया और पूरा उत्पादन बिगड़ गया है.
तेलंगाना में हल्का असर
तेलंगाना पर इस चक्रवात का सीधा असर कम रहने की संभावना है. IMD हैदराबाद केंद्र के वैज्ञानिक धर्म राजू ने बताया कि राज्य के दक्षिणी हिस्सों में 30 नवंबर को हल्की बारिश हो सकती है. वहीं एक दिसंबर को खम्मम, नलगोंडा, सूर्यपेट और नागरकुरनूल जिलों में भारी बारिश की आशंका जताई गई है. मौसम विभाग ने किसानों और मछुआरों को सतर्क रहने की सलाह दी है. खासकर तटीय इलाकों में रहने वालों को अनावश्यक यात्रा से बचने के निर्देश दिए गए हैं.
तमिलनाडु देश का बड़ा नमक उत्पादक
तमिलनाडु भारत के शीर्ष नमक उत्पादक राज्यों में शामिल है और राष्ट्रीय उत्पादन में लगभग 4.7 प्रतिशत का योगदान देता है. यहां खाद्य नमक के साथ-साथ औद्योगिक नमक भी बड़े पैमाने पर तैयार होता है. उत्पादन की विधि समुद्री जल के सौर वाष्पीकरण पर आधारित है, जिसमें समुद्री पानी को नमक के तालाबों में भरकर धूप में सुखाया जाता है.
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थूथुकुडी नमक की राजधानी
राज्य में नमक उत्पादन मुख्य रूप से नौ तटीय जिलों में होता है. इनमें थूथुकुडी सबसे बड़ा केंद्र है, जिसे ‘तमिलनाडु की नमक राजधानी’ कहा जाता है. वेदारण्यम जैसे इलाकों में भी बड़े पैमाने पर नमक के भंडार मौजूद हैं, जहां हजारों श्रमिक इस उद्योग से जुड़े हुए हैं लेकिन हाल के वर्षों में बेमौसम बारिश और चक्रवातों ने इस पारंपरिक उद्योग को गंभीर नुकसान पहुंचाया है. नमक के तालाबों में पानी भर जाने से तैयार नमक घुल जाता है और उत्पादन घट जाता है. इसका सीधा असर हजारों श्रमिकों की रोजी-रोटी पर पड़ता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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