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मध्य प्रदेश के दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की बड़ी जीत, घनश्याम सिंह ने बीजेपी को हराया

Datia By-Election: दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी को हराकर अपनी सीट बचा ली. घनश्याम सिंह ने बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को 6029 वोटों से मात दी.

Datia By-Election: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी को कड़ी मात दी और अपनी सीट बचाने में सफल रही. बीजेपी ने इस चुनाव में आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था, जबकि कांग्रेस ने घनश्याम सिंह पर भरोसा जताया. वोटों की गिनती के दौरान घनश्याम सिंह लगातार आगे रहे और अंत में उन्होंने 6029 वोटों से शानदार जीत हासिल की.

बीजेपी को बड़ा झटका

यह सीट पहले बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के पास थी. लेकिन इस बार पार्टी ने उन्हें टिकट न देकर आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा. नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस ने सीट अपने पास रखी और बीजेपी को बड़ा झटका दिया. जीत के बाद कांग्रेस समर्थकों में जश्न का माहौल है. लगातार जनाधार खो रही कांग्रेस के लिए यह जीत किसी संजीवनी से कम नहीं मानी जा रही है. हालांकि अभी आधिकारिक ऐलान बाकी है.

कौन हैं घनश्याम सिंह?

घनश्याम सिंह लंबे समय से दतिया और आसपास के इलाकों में सक्रिय नेता के तौर पर जाने जाते हैं. वह कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और जनता से सीधे जुड़ाव रखने वाले नेता माने जाते हैं.

दतिया और सेवढ़ा में पकड़

दतिया राजघराने के मुखिया घनश्याम सिंह कांग्रेस से लंबे समय से जुड़े हैं. वह एक जमीनी नेता हैं और भाषण देने में माहिर हैं. उनकी पकड़ दतिया और सेवढ़ा दोनों विधानसभाओं में मजबूत है. उन्होंने वर्षों की मेहनत से अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाई है.

उतार-चढ़ाव भरा सफर

घनश्याम सिंह का राजनीतिक सफर काफी रोचक रहा है. वह दतिया से दो बार और सेवढ़ा से एक बार विधायक रह चुके हैं. 1993 में पहली बार कांग्रेस टिकट पर जीत दर्ज की. 1998 में हार का सामना करना पड़ा. 2003 में फिर जीत हासिल की. 2008 और 2013 में बीजेपी उम्मीदवारों से हार गए. 2018 में सेवढ़ा से चुनाव जीतकर विधायक बने. 2023 में फिर सेंवढ़ा से चुनाव लड़ा लेकिन हार गए.

हार के बाद भी सक्रिय

लगातार हार के बावजूद घनश्याम सिंह ने पार्टी संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दिया. उन्होंने दतिया और सेवढ़ा दोनों क्षेत्रों में सक्रिय रहकर जनता से जुड़ाव बनाए रखा. यही वजह रही कि जब कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म हुई तो पार्टी ने उपचुनाव में घनश्याम सिंह को उम्मीदवार बनाया.

कांग्रेस की उम्मीदों पर खरे

दतिया उपचुनाव में कांग्रेस को एक मजबूत उम्मीदवार की तलाश थी. घनश्याम सिंह इस कसौटी पर खरे उतरे. संगठन से लंबे समय से जुड़े रहने और क्षेत्र में उनकी पहचान के चलते पार्टी ने उन पर भरोसा किया. यह भरोसा जीत में बदल गया और कांग्रेस को बड़ी राहत मिली.

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राजनीतिक संदेश

इस जीत ने कांग्रेस समर्थकों का उत्साह बढ़ा दिया है. साथ ही यह उपचुनाव एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी देता है कि कांग्रेस अभी भी मध्य प्रदेश की राजनीति में अपनी पकड़ बनाए रखने की क्षमता रखती है.

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-भारत एक्सप्रेस



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