Delhi Car Blast: दिल्ली को दहलाने वाले कार ब्लास्ट की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. खुफिया एजेंसियों को पक्का शक है कि यह एक फिदायीन आतंकी हमला था. 9 नवंबर की शाम 6:52 बजे नेताजी सुभाष चंद्र बोस मार्ग के ट्रैफिक सिग्नल पर i20 कार में विस्फोट हुआ, जिसमें 9 लोगों की मौत हो गई और 20 अन्य घायल हो गए. धमाके की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि आसपास की 6 गाड़ियां और 3 ऑटोरिक्शा जल गए, स्ट्रीट लाइटें फूट गईं और लाल किला मेट्रो स्टेशन व दुकानों के कांच चकनाचूर हो गए.
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में यूएपीए की धारा 16 और 18 के तहत केस दर्ज किया है, साथ ही विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 3 और 4 भी जोड़ी गई है. एनआईए, एनएसजी और फॉरेंसिक टीमें घटनास्थल पर पहुंचकर सैंपल इकट्ठा कर रही हैं.
कार की पहचान और संदिग्ध
जांच में पता चला कि धमाके में इस्तेमाल हुई i20 कार हरियाणा के गुरुग्राम नॉर्थ आरटीओ में रजिस्टर्ड थी. इसका नंबर HR 26 7624 था और यह मोहम्मद सलमान के नाम पर दर्ज थी. सलमान ने पूछताछ में बताया कि उसने कार पुलवामा निवासी तारिक को बेच दी थी. तारिक को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने हिरासत में ले लिया है.
दिल्ली पुलिस को शक है कि कार में आतंकी डॉक्टर उमर मोहम्मद सवार था, जो फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल का प्रमुख सदस्य है और फरार चल रहा है. धमाके के वक्त कार में तीन संदिग्ध मौजूद थे. मृत व्यक्ति का डीएनए टेस्ट कराया जाएगा ताकि यह पुष्टि हो सके कि वह उमर था या नहीं.

कार की टाइमलाइन
सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि कार 10 नवंबर को दोपहर 3:19 बजे लाल किले के पास सुनहरी मस्जिद की पार्किंग में दाखिल हुई और करीब 3 घंटे तक वहीं खड़ी रही. शाम 6:48 बजे कार बाहर निकली और महज 4 मिनट बाद धमाका हो गया. जांच एजेंसियों को शक है कि मस्जिद की पार्किंग में ही कार के अंदर विस्फोटक प्लांट किया गया था.
दिल्ली पुलिस ने ब्लास्ट से ठीक पहले की तस्वीर भी जारी की है, जिसमें कार सुनहरी मस्जिद के पास सड़क पर जाती हुई दिख रही है.
फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल से कनेक्शन
जांच में सामने आया है कि इस ब्लास्ट के तार फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल से जुड़े हैं. यह मॉड्यूल एक अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क है, जिसका भंडाफोड़ हाल ही में हुआ था. इसमें जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवात-उल-हिंद जैसे आतंकी संगठनों से जुड़े लोग शामिल थे.
इस मॉड्यूल में तीन डॉक्टर भी शामिल थे जिसमें फरीदाबाद के डॉक्टर मुजम्मिल अहमद गनाई, पुलवामा के डॉ. आदिल अहमद राथर और लखनऊ की डॉ. शाहीन शाहिद. शाहीन की कार से AK-47 बरामद हुई थी.
इसके अलावा कई अन्य संदिग्धों को भी पकड़ा गया है, जिनमें श्रीनगर, शोपियां और गंदरबल के लोग शामिल हैं.

भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद
10 नवंबर को फरीदाबाद में पकड़े गए डॉक्टर मुअजमिल के किराए के घर से पुलिस ने 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट, IED बनाने की 2900 किलो सामग्री, एके-56 राइफल, AK Krinkov असॉल्ट राइफल, बरेटा पिस्टल, चीनी स्टार पिस्टल, सैकड़ों कारतूस, डेटोनेटर, वायर, टाइमर और रिमोट कंट्रोल बरामद किए.
पुलिस का कहना है कि यह मॉड्यूल दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत में बड़े हमलों की योजना बना रहा था. इसमें शामिल आरोपी पढ़े-लिखे प्रोफेशनल्स थे, जिन्हें “व्हाइट कॉलर टेरर नेटवर्क” कहा जा रहा है. ये लोग आतंकवाद को तकनीकी और आर्थिक मदद दे रहे थे.
राजनीतिक और सुरक्षा प्रतिक्रिया
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि दिल्ली कार ब्लास्ट की सभी एंगल से जांच की जा रही है. अगर यह आतंकी घटना साबित होती है तो इसकी पूरी परतें उजागर होंगी.
दिल्ली कार ब्लास्ट ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जांच एजेंसियों को मिले सुराग इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि यह हमला किसी बड़े आतंकी नेटवर्क का हिस्सा था. फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल से जुड़े डॉक्टरों और अन्य संदिग्धों की गिरफ्तारी ने साफ कर दिया है कि आतंकवाद अब व्हाइट कॉलर अपराधियों के जरिए भी फैल रहा है. आने वाले दिनों में जांच से और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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