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मकान मालिक नहीं तो वोट का अधिकार भी नहीं? चांदनी चौक वोटर लिस्ट विवाद पर खड़े हुए गंभीर सवाल

दिल्ली के चांदनी चौक विधानसभा क्षेत्र के एक पोलिंग बूथ पर 909 मतदाताओं में से 908 के नाम वोटर लिस्ट से हटने का मामला सामने आया है.

रिपोर्ट- तनु चौधरी


दिल्ली के चांदनी चौक विधानसभा क्षेत्र से सामने आया वोटर लिस्ट का एक मामला कई सवाल खड़ा कर रहा है. यहां एक पोलिंग बूथ पर कभी 909 मतदाता दर्ज थे, लेकिन अब सूची में सिर्फ एक व्यक्ति का नाम बचा है. कुल 909 मतदाताओं में से 908 नाम मतदाता सूची से बाहर हो चुके हैं.

जानकारी के मुताबिक, 1 जनवरी 2025 की वोटर लिस्ट में इस बूथ पर कुल 909 मतदाता दर्ज थे. इसके बाद मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए गए. बताया गया है कि SIR के दौरान 728 मतदाताओं के नाम हटाए गए, जबकि इससे पहले हुई mapping exercise में 180 नाम हटाए जा चुके थे.

इस तरह 909 में से 908 मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हो गए और बूथ पर केवल एक मतदाता का नाम रह गया है.

मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि स्थानीय लोगों का कहना है कि वे अब भी उसी इलाके में रह रहे हैं. उनका दावा है कि SIR के दौरान उन्होंने Enumeration Forms भी जमा किए थे. कुछ लोगों के पास BLO की ओर से दिए गए acknowledgment भी मौजूद हैं.

इसके बावजूद BLO-BLA बैठक के रिकॉर्ड में घर-घर जाकर केवल एक Enumeration Form मिलने की बात दर्ज होने का दावा किया जा रहा है. यही विरोधाभास अब पूरे मामले पर सवाल खड़े कर रहा है.

स्थानीय लोगों के मुताबिक, उन्हें यह भी कहा जा रहा है कि अगर वे बिजली-पानी का बिल या जमीन के मालिकाना हक से जुड़ा कोई दस्तावेज नहीं देते, तो उनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं रहेगा.

क्या वोट देने का अधिकार सिर्फ मकान मालिकों के लिए है?

यहीं से सबसे बड़ा सवाल सामने आता है. अगर कोई व्यक्ति किसी जगह पर रह रहा है, लेकिन उसके नाम पर मकान या जमीन नहीं है, तो क्या उसे मतदाता बनने का अधिकार नहीं होना चाहिए?

चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, बेघर नागरिक भी मतदाता के तौर पर पंजीकरण करा सकते हैं. ऐसे में सिर्फ जमीन या मकान के मालिकाना हक को मतदाता के अधिकार से जोड़ना अपने आप में गंभीर सवाल पैदा करता है.

किसी एक बूथ की सूची में 909 मतदाताओं में से 908 नामों का हट जाना सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. खासकर तब, जब संबंधित इलाके में रहने वाले लोग अपने नाम हटाए जाने पर सवाल उठा रहे हों और कुछ लोगों के पास Enumeration Forms जमा करने के प्रमाण होने की बात सामने आ रही हो.

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-भारत एक्सप्रेस



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