दिल्ली हाईकोर्ट.
दिल्ली हाई कोर्ट ने 1984 सिख विरोधी दंगे के एक मामले में पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार की जमानत के खिलाफ दायर याचिका को निरर्थक मानते हुए इसका निपटारा कर दिया. एसआईटी ने अदालत में कहा कि सज्जन कुमार को दोषी ठहराए जाने के बाद वह हिरासत में हैं, इसलिए अब इस याचिका पर सुनवाई की कोई आवश्यकता नहीं है. जस्टिस विकास महाजन ने इस घटनाक्रम पर गौर करते हुए यह फैसला सुनाया.
दंगों के दौरान हत्या का मामला
12 फरवरी, 2023 को दिल्ली की ट्रायल कोर्ट ने सज्जन कुमार को 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान दिल्ली के सरस्वती विहार में दो व्यक्तियों की हत्या के मामले में दोषी ठहराया था. हालांकि, अदालत ने अभी तक सजा पर कोई आदेश नहीं दिया है. सज्जन कुमार पहले ही पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए दंगों से संबंधित एक अन्य हत्या मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं.
एसआईटी की राहत के लिए चुनौती
एसआईटी ने 27 अप्रैल, 2022 को निचली अदालत द्वारा सज्जन कुमार को दी गई जमानत को रद्द करने की मांग की थी. उच्च न्यायालय ने 4 जुलाई, 2022 को इस आदेश पर रोक लगाई थी और कुमार को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा था. मामला राज नगर के निवासी जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुण दीप सिंह की हत्या से संबंधित है. एसआईटी ने दावा किया कि घटना में चार अन्य लोग भी घायल हुए थे.
न्यायिक रिकॉर्ड का नष्ट होना
एसआईटी ने यह भी बताया कि 1985 में न्यायमूर्ति रंगनाथ मिश्रा आयोग के सामने एक महिला द्वारा हलफनामे के आधार पर 1991 में सरस्वती विहार पुलिस स्टेशन में दंगा और हत्या का मामला दर्ज किया गया था. हालांकि, उस एफआईआर का न्यायिक रिकॉर्ड बाद में हटा दिया गया. कुमार को 1984 के दंगों के दौरान दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पालम कॉलोनी में पांच सिखों की हत्या और एक गुरुद्वारा जलाने के मामले में भी दोषी ठहराया गया था, जिसके लिए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी.
अब सज्जन कुमार की अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जिसमें वह अपनी सजा को चुनौती दे रहे हैं. वहीं, हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका को निरर्थक करार देते हुए यह स्पष्ट किया कि जब आरोपी दोषी ठहराया जा चुका है और हिरासत में है, तो याचिका पर कोई फैसला नहीं लिया जा सकता.
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