दिल्ली हाई कोर्ट ने किसी मामले की सुनवाई से पहले मीडिया को याचिका, दस्तावेज और हलफनामा जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ देने की प्रवृत्ति पर कड़ी आपत्ति जताई है. कोर्ट ने मामले से जुड़े दस्तावेज मीडिया में लीक करने के मामले में दिल्ली बार काउंसिल को दो अधिवक्ताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का आदेश दिया है. साथ ही, मीडिया को दस्तावेज़ देने के आरोपी एक कंपनी के निदेशक, रूप दर्शन पांडे को दो सप्ताह की कैद और दो हजार रुपये जुर्माना लगाने की सजा सुनाई है.
मीडिया में दस्तावेज़ लीक पर सख्त टिप्पणी
न्यायमूर्ति प्रतिबा मनिंदर सिंह और न्यायमूर्ति अमित शर्मा की पीठ ने कहा कि रूप दर्शन पांडे आदतन अपराधी हैं, जिन्होंने कोर्ट, न्यायमूर्तियों और वकीलों के खिलाफ आरोप लगाने की आदत बना ली है. पीठ ने कहा कि यह अपमानजनक आचरण कोई अनजानी गलती नहीं है और इससे पक्षकारों के बीच पूर्वाग्रह पैदा हो सकता है, जो संबंधित अदालत के स्वतंत्र निर्णय पर असर डाल सकता है. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाओं और दस्तावेजों को कोर्ट के विचार किए जाने से पहले मीडिया में लीक करना स्वीकार्य नहीं है.
पत्रकार को दी गई चेतावनी
कोर्ट ने इस मामले में एक पत्रकार को भी संबोधित किया, जिसने एक कंपनी द्वारा दूसरी कंपनी को जारी किए गए बिना तारीख वाले और बिना हस्ताक्षर वाले कानूनी नोटिस को सार्वजनिक कर दिया था. कोर्ट ने पत्रकार को भविष्य में अपनी जिम्मेदारी निभाने और अधिक सावधानी बरतने की सलाह दी, साथ ही उसे इस मामले में बरी कर दिया.
कोर्ट ने शुरू की अवमानना कार्यवाही
यह मामला अवमानना के आरोपों से जुड़ा था, क्योंकि कानूनी नोटिस में कोर्ट के रजिस्ट्री के कामकाज, फोरम शॉपिंग के आरोपों और कोर्ट के समक्ष मामलों के बारे में निंदनीय टिप्पणियां की गई थीं. अदालत ने पाया कि पांडे ने जानबूझकर मीडिया को कानूनी नोटिस लीक कर दूसरी कंपनी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी.
-भारत एक्सप्रेस
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