दिल्ली विधानसभा में कैग रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देने की मांग वाली बीजेपी विधायकों की याचिका पर निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया है. जस्टिस सचिन दत्ता की बेंच ने कहा कि अप्रत्याशित देरी हुई है, लेकिन विधानसभा की कार्यवाही में हस्तक्षेप नहीं कर सकते है.
कोर्ट ने 16 जनवरी को फैसला सुरक्षित रखा
हाई कोर्ट ने 16 जनवरी को सभी पक्षों की जिरह के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. मामले की सुनवाई के दौरान विधानसभा के स्पीकर और दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि सीएजी रिपोर्ट को विधानसभा पटल पर रखे जाने की कोई जरूरत नही है, वो भी तब जब विधानसभा चुनाव जल्द ही होने वाले है. विधानसभा सचिवालय की ओर से कहा गया था कि विधानसभा का कार्यकाल फरवरी में खत्म हो रहा है. ऐसे में अभी सीएजी की रिपोर्ट पेश करने से कोई सार्थक जरूरत पूरी नही होगी.
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने कहा था कि दिल्ली सरकार अपनी गलती का फायदा उठा रही है. मुद्दा यह है कि कैग रिपोर्ट विधानसभा और जनता के लिए महत्वपूर्ण है. यह भी कहा था कि विपक्षी नेता विधानसभा सदस्य है और अगर सरकार को बच निकलने की इजाजत दी गई तो यह लोगों के साथ संविधान से धोखाधड़ी होगी. इससे पहले 16 दिसंबर को दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने लंबित 14 सीएजी रिपोर्ट्स को लेकर मुख्यमंत्री आतिशी को पत्र लिखा था. उन्होंने दिल्ली विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की थी. ताकि लंबित रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखा जा सके. एलजी का कहना था कि रिपोर्ट को विधानसभा में समय पर पेश न करके दिल्ली सरकार अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वहन करने में नाकामयाब रही.
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-भारत एक्सप्रेस
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