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Liquor Policy Case: दिल्ली हाईकोर्ट ने जेल में बंद चनप्रीत सिंह की जमानत याचिका पर ED को जारी किया नोटिस, मांगा जवाब

चनप्रीत के अधिवक्ता ने कहा याचिकाकर्ता में कानून की प्रक्रिया से बचने की प्रवृत्ति नहीं है, याचिकाकर्ता जांच की पूरी अवधि के दौरान उपलब्ध रहा है और याचिकाकर्ता ने हरसंभव तरीके से सहयोग किया है.

Delhi Highcourt
Vikash Jha Edited by Vikash Jha

Liquor Policy Case: दिल्ली हाइकोर्ट ने दिल्ली शराब नीति मामले में जेल में बंद चनप्रीत सिंह की जमानत याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. निचली अदालत ने हाल ही में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी. न्यायमूर्ति अमित शर्मा ने मामले की 2 जुलाई को सुनवाई करेगी. चनप्रीत को दिल्ली आबकारी नीति से उत्पन्न अपराध की आय के हस्तांतरण और उपयोग में शामिल एक प्रमुख व्यक्ति बताया जाता है.

याचिकाकर्ता में कानूनी प्रक्रिया से बचने की प्रवृत्ति नहीं

चनप्रीत के अधिवक्ता ने कहा याचिकाकर्ता में कानून की प्रक्रिया से बचने की प्रवृत्ति नहीं है, याचिकाकर्ता जांच की पूरी अवधि के दौरान उपलब्ध रहा है और याचिकाकर्ता ने हरसंभव तरीके से सहयोग किया है. हालांकि, ईडी ने कानून के विपरीत आरोपी या याचिकाकर्ता को गिरफ्तार कर लिया. उन्होंने कहा याचिकाकर्ता की जांच पूरी हो चुकी है इसके अलावा ईडी द्वारा दिए गए बयान के अनुसार अंतिम अभियोजन शिकायत 3 जुलाई, 2024 को या उससे पहले दायर की जाएगी.

याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी जांच एजेंसी द्वारा दर्ज किए गए बयानों पर आधारित है और ऐसा कोई विश्वसनीय सबूत या गवाह नहीं है, जिसके आधार पर याचिकाकर्ता या आरोपी का प्रथम दृष्टया अपराध भी स्थापित किया जा सके. उन्होंने कहा जिन गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं वे खुद संदिग्ध हैं क्योंकि वे निश्चित रूप से हवाला ऑपरेटर हैं, जिनके बयान खुद अविश्वसनीय हैं.

ED से पहले CBI ने किया था गिरफ्तार

दिल्ली उच्च न्यायालय को यह भी बताया गया कि आवेदक को प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तार किए जाने से पहले, 15 मई, 2023 को सीबीआई द्वारा पूर्व अपराध में गिरफ्तार किया गया था हालांकि उसे ट्रायल कोर्ट के न्यायाधीश द्वारा 22 जुलाई 2023 को नियमित रूप से रिहा कर दिया गया था.

ईडी के अनुसार चनप्रीत सिंह आप के गोवा चुनाव अभियान के लिए मई-जून 2021 से मार्च 2022 तक एक फ्रीलांस कार्यकर्ता के रूप में आप में शामिल हुए. उन्हें आम आदमी पार्टी से सीधे वेतन भी मिलता था. उन्हें मेसर्स विजस्पक कम्युनिकेशंस से भी वेतन मिला है, जिसे दिल्ली सरकार के सूचना एवं प्रचार विभाग ने जनसंपर्क कार्य के लिए नियुक्त किया था.

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-भारत एक्सप्रेस



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