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दिल्ली में स्वाइन फ्लू का कहर, पिछले साल से 8 गुना ज्यादा मिले केस, एक्सपर्ट ने क्या कहा?

Swine Flu Outbreak: दिल्ली-NCR में H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामलों में इस साल रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखी गई है. विशेषज्ञों का क्या कहना है?

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दिल्ली-NCR में स्वाइन फ्लू का कहर

Swine Flu Outbreak: दिल्ली और आसपास के इलाकों में इस वक्त H1N1 स्वाइन फ्लू तेजी से फैल रहा है. 21 अगस्त तक राजधानी में 1,777 मरीज दर्ज किए गए, जबकि पिछले साल इसी समय सिर्फ 229 केस थे. यानी इस बार संक्रमण करीब आठ गुना ज्यादा है. अस्पतालों में भीड़ बढ़ रही है और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है.

कब ज्यादा डरने की जरूरत नहीं?

विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादातर मरीजों में लक्षण हल्के हैं. यह मौसमी फ्लू है, जो मौसम बदलने पर सक्रिय होता है. तेज बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, बदन दर्द और थकान जैसे लक्षण दिखें तो सतर्क रहना जरूरी है.

किन्हें ज्यादा खतरा?

डॉक्टरों के मुताबिक बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और पहले से बीमार लोग ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं. इन समूहों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है.

नया स्ट्रेन नहीं मिला

ICMR ने साफ किया है कि देश में कोई नया स्ट्रेन सामने नहीं आया है. अभी जो वायरस फैल रहा है, वह 2025 से ही सर्कुलेशन में है. इसमें ऐसा कोई बदलाव नहीं मिला जिससे यह ज्यादा खतरनाक माना जाए.

दिल्ली में परिवारों पर असर

लोकल सर्कल की रिपोर्ट बताती है कि NCR के 54% परिवारों में कम से कम एक सदस्य संक्रमित है. LNJP अस्पताल के पल्मोनरी विभाग प्रमुख डॉ. नरेश कुमार कहते हैं कि यह इन्फ्लुएंजा का ही सबटाइप है. तीन-चार दिन में ठीक हो जाता है, लेकिन बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी वाले मरीजों को तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

घरेलू देखभाल से राहत

एम्स के वरिष्ठ डॉक्टर के अनुसार ज्यादातर मरीज बिना दवा के ठीक हो जाएंगे. नाक बंद होने पर भाप लें, गले में खराश हो तो गरारे करें. अगर परेशानी बढ़े तो डॉक्टर से मिलें.

पैनिक नहीं, सावधानी जरूरी

डॉक्टरों का कहना है कि सामान्य दवाएं जैसे एंटी-एलर्जिक और घरेलू उपाय काफी हैं. शुगर के मरीजों को खास ध्यान रखना चाहिए. संक्रमण ड्रॉपलेट्स से फैलता है, इसलिए मास्क पहनना और हाथ धोना जरूरी है.

हर साल बढ़ते केस

विशेषज्ञ बताते हैं कि इस मौसम में हर साल केस बढ़ते हैं. कभी-कभी जांच ज्यादा होने से आंकड़े भी ज्यादा दिखते हैं. यह अच्छी बात है कि सर्विलांस सिस्टम सक्रिय है और संक्रमण की पहचान हो रही है.

असली चिंता क्या है?

डॉक्टरों का कहना है कि असली चिंता तब होगी जब अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या बढ़े, वेंटिलेटर की जरूरत ज्यादा हो या मृत्यु दर बढ़े. फिलहाल ऐसी स्थिति नहीं है.

जीवनशैली और संक्रमण

आजकल लोग भीड़भाड़ वाली जगहों जैसे मेट्रो, स्कूल और ऑफिस में लगातार संपर्क में रहते हैं. यही वजह है कि संक्रमण तेजी से फैलता है. पहले यह खास मौसम तक सीमित था, लेकिन अब यात्रा और आवाजाही के कारण कहीं भी पहुंच सकता है.

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दिल्ली-NCR में स्वाइन फ्लू के केस जरूर बढ़े हैं, लेकिन नया स्ट्रेन नहीं मिला है. ज्यादातर मरीज हल्के लक्षणों के साथ ठीक हो रहे हैं. पैनिक करने की बजाय सावधानी बरतना ही सबसे बड़ा बचाव है.

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-भारत एक्सप्रेस



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