AI IMAGE
देश में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के एक बेहद खतरनाक और शातिर जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है. राजस्थान और पंजाब के सीमावर्ती इलाकों से लेकर दिल्ली और पश्चिम बंगाल तक फैले इस नेटवर्क की कड़ियां सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच, पश्चिम बंगाल एसटीएफ (STF) और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने मिलकर इस पूरे रैकेट का भंडाफोड़ करने के लिए बड़ा संयुक्त अभियान शुरू किया है.
पाकिस्तान में कैसे एक्टिव हुआ भारत का सिम?
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार भारत में आम लोगों के नाम पर जारी किए गए मोबाइल सिम कार्ड पाकिस्तान तक पहुंचाए गए. वहां बैठकर पाकिस्तानी खुफिया ऑपरेटिव्स (PIOs) ने इन भारतीय नंबरों पर व्हाट्सएप (WhatsApp) अकाउंट एक्टिवेट किए.
इन भारतीय नंबरों के जरिए पाकिस्तान में बैठे एजेंट भारत में मौजूद महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठानों, रणनीतिक ठिकानों और कंट्रोल रूम से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों से संपर्क साध रहे थे, ताकि उन्हें झांसे में लेकर संवेदनशील और गोपनीय जानकारियां हासिल की जा सकें.
पश्चिम बंगाल से जारी हुए सिम
जांच एजेंसियों के हाथ मुख्य रूप से पांच ऐसे भारतीय सिम कार्ड लगे हैं, जिनका इस्तेमाल पाकिस्तान से हो रहा था. ये सभी सिम कार्ड पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलोंकूचबिहार और उत्तर दिनाजपुर के पते पर जारी किए गए थे.
इनमें अच्छरुद्दीन, मोहम्मद शफीकुल इस्लाम, नूरनासिरुद्दीन अली, छफर अली और रोजिना बीबी जैसे स्थानीय लोगों के नाम शामिल हैं. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ये सिम कार्ड सरहद पार पाकिस्तान कैसे पहुंचे? जांच में बांग्लादेश के रंगपुर के रहने वाले अकबर हुसैन उर्फ ‘सम्राट’ का नाम सामने आया है, जिससे अंदेशा जताया जा रहा है कि सिम कार्डों की यह तस्करी बांग्लादेश और नेपाल के रास्तों के जरिए पाकिस्तान तक की गई.
सुरक्षा एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की बैकवर्ड और फॉरवर्ड कड़ियों को खंगाल रही हैं, ताकि भारत में छिपे इसके मददगारों को जल्द से जल्द दबोचा जा सके.
यह भी पढ़ें: ‘आपका धर्म पारसी, अन्य धर्मों…’, राहुल गांधी के मनुस्मृति वाले बयान पर निशिकांत दुबे का हमला
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


