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ISI के बड़े जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़: दिल्ली-पंजाब से 11 और गिरफ्तार, सैन्य ठिकानों पर लगाए थे सोलर CCTV कैमरे

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ISI द्वारा संचालित एक खतरनाक जासूसी गिरोह का पर्दाफाश किया है. इस मॉड्यूल ने दिल्ली कैंट और सोनीपत जैसे संवेदनशील इलाकों में गुपचुप तरीके से सीसीटीवी कैमरे लगाए थे, जिनकी फीड सीधे पाकिस्तान जा रही थी. पुलिस ने अब तक 35 आरोपियों को गिरफ्तार कर बड़े आतंकी हमले को टाल दिया है.

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Delhi Police की स्पेशल सेल ने एक ऐसी साजिश का पर्दाफाश किया है जिसे सुनकर किसी के भी होश उड़ जाएं. पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI भारत के खिलाफ एक बहुत ही शातिर और खतरनाक ‘जासूसी नेटवर्क’ चला रही थी. पुलिस ने दिल्ली और पंजाब में छापेमारी कर इस गिरोह के 11 और सदस्यों को धर दबोचा है. चौंकाने वाली बात यह है कि ये लोग किसी आम जासूस की तरह नहीं, बल्कि एक प्रॉपर ‘टेरर मॉड्यूल’ की तरह काम कर रहे थे.

संवेदनशील ठिकानों पर पाकिस्तानी नजर

इस गिरोह ने जासूसी करने का जो तरीका निकाला, वो सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी चिंता का विषय है. जांच में पता चला है कि इन लोगों ने दिल्ली कैंट, सोनीपत रेलवे स्टेशन और कठुआ जैसे संवेदनशील सैन्य ठिकानों के पास सोलर पावर से चलने वाले हाई-टेक सीसीटीवी कैमरे लगा रखे थे. इन कैमरों की लाइव फीड सीधे पाकिस्तान भेजी जा रही थी.

यानी सरहद पार बैठे दुश्मन हमारे आर्मी मूवमेंट और रेलवे स्टेशनों की पल-पल की जानकारी घर बैठे देख रहे थे. पुलिस ने अब तक ऐसे 9 सोलर कैमरे बरामद किए हैं.

बड़े हमले की थी साजिश

जासूसी के इस जाल की परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं. सबसे पहले गाजियाबाद पुलिस ने 14 मार्च को एक महिला समेत 6 लोगों को पकड़ा था, जिसके बाद कड़ियां जुड़ती गईं और गिरफ्तारियों का आंकड़ा 24 तक पहुंच गया. अब स्पेशल सेल की ताजा कार्रवाई के बाद इस गिरोह के कुल 35 सदस्य सलाखों के पीछे हैं. पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई से न केवल जासूसी रुकी है, बल्कि सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर होने वाला एक बड़ा ग्रेनेड हमला भी टल गया है.

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हथियारों की तस्करी और फंडिंग का खेल

यह मॉड्यूल सिर्फ फोटो और वीडियो भेजने तक सीमित नहीं था. ये लोग पाकिस्तान से हथियारों की तस्करी भी कर रहे थे. पुलिस ने इनके पास से 4 पिस्टल और 24 कारतूस बरामद किए हैं. पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि हथियारों को बेचकर जो पैसा मिलता था, उसी का इस्तेमाल जासूसी नेटवर्क को चलाने और आतंकियों की फंडिंग के लिए किया जा रहा था.

फिलहाल, खुफिया एजेंसियां पकड़े गए आरोपियों से कड़ी पूछताछ कर रही हैं. पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि देश के किन-किन और हिस्सों में इन्होंने अपने कैमरे या जासूस प्लांट कर रखे हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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