रिपोर्टर- आदित्य द्विवेदी
दिल्ली में रहने वाले लगभग 50 लाख लोग अब अपनी झुग्गी-झोपड़ी या अवैध कॉलोनियों के घरों को लेकर लंबे समय से चली आ रही परेशानी से राहत पा सकते हैं. दिल्ली सरकार ने पीएम-उदय योजना और टीओडी (Transit Oriented Development) पॉलिसी के जरिए इस दिशा में बड़ा कदम उठाया है.
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने मिलकर इस योजना को मंजूरी दी है, जो लाखों लोगों के लिए मालिकाना हक और बुनियादी सुविधाओं का रास्ता आसान बनाएगी. अब लोगों को अपने घरों के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने की जरूरत नहीं होगी. सरकार ने तय किया है कि 7 दिनों में सर्वे रिपोर्ट तैयार होगी और 45 दिनों में सभी औपचारिकताएं पूरी कर दी जाएंगी. ‘जैसा है, जहां है’ नीति के तहत निर्माण को मान्यता मिल जाएगी.
- कुल अवैध कॉलोनियां: 1731
- रेगुलराइज होने वाली: 1511
- O-ज़ोन कॉलोनियां: लगभग 200
- मानकों पर खरी नहीं: 51
- मालिकाना हक मिल चुका: 40,000+ लोग
- संभावित लाभार्थी: 50 लाख लोग
दिल्ली में अब सर्किल रेट भी पूरे शहर में एक समान होगा और लेआउट प्लान की आवश्यकता खत्म हो जाएगी. इस योजना के तहत बैंक से लोन लेना आसान होगा और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट तेज होगा.
मेट्रो के पास आवास का विकास
मेट्रो कॉरिडोर के आसपास TOD पॉलिसी के तहत अब बड़े पैमाने पर किफायती आवास बनाए जाएंगे. विकास के दायरे में 100 स्क्वायर मीटर तक घर बनाने की अनुमति और FAR (Floor Area Ratio) बढ़ाकर 400-500 कर दी गई है. इससे निजी रियल एस्टेट कंपनियों की एंट्री भी संभव होगी.
हालांकि, नए मकानों के लिए दिल्ली नगर निगम से नक्शा पास करवाना अनिवार्य रहेगा, लेकिन पुराने बने घरों का रेगुलराइजेशन भी तेज़ी से किया जाएगा.
टीओडी एरिया में निजी निवेश आने से हाउसिंग सप्लाई बढ़ेगी और लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी. पीएम-उदय के तहत पहले ही 40,000 से ज्यादा लोगों को मालिकाना हक मिल चुका है. अब सभी प्रक्रियाएं सीधे दिल्ली सरकार के पास होगी, जिससे काम तेजी से पूरा होगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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