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94 कॉलोनियां, 22KM का दायरा और 15 लाख लोग: दिल्ली में बुलडोजर एक्शन का डर; आखिर क्या है O-Zone?

दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद यमुना नदी के 22 किलोमीटर के दायरे को ‘O-ZONE’ घोषित कर दिया गया है. इसके चलते वजीराबाद, बुराड़ी और जगतपुर समेत दिल्ली की 94 अवैध कॉलोनियों के करीब 15 लाख लोग बुलडोजर की कार्रवाई के डर से सहमे हुए हैं.

Yamuna O Zone Declared 94 Illegal Colonies Face Demolition Threat In Delhi

देश की राजधानी दिल्ली में यमुना नदी के किनारे रहने वाले लाखों लोगों के आशियानों पर इस समय संकट के गहरे बादल मंडरा रहे हैं. दिल्ली हाई कोर्ट के एक कड़े निर्देश के बाद प्रशासन ने यमुना नदी के करीब 20 से 22 किलोमीटर के दायरे को ‘O-ZONE’ (ओ-जोन) यानी प्रतिबंधित बाढ़ क्षेत्र घोषित कर दिया है. इस फैसले के आते ही दिल्ली की 94 अनधिकृत (अवैध) कॉलोनियों में हड़कंप मच गया है. इन इलाकों में रहने वाले करीब 15 लाख लोग इस समय भारी दहशत और असुरक्षा के माहौल में जी रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि कभी भी उनके घरों पर पीला पंजा यानी बुलडोजर चल सकता है.

क्या है ये ‘O-ZONE’?

सरल भाषा में समझें तो पर्यावरण और यमुना नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए हाई कोर्ट के आदेश पर नदी के आसपास की जमीन को सुरक्षित क्षेत्र (Flood Zone) माना गया है. नियमों के मुताबिक, इस ‘O-ZONE’ के दायरे में किसी भी तरह के पक्के या नए निर्माण कार्य पर पूरी तरह पाबंदी है.

प्रशासन ने अब जगतपुर, मिलन विहार, दीपांशु कॉलोनी, झडौदा पार्ट-3, संगम विहार, वजीराबाद और रामघाट जैसी 94 कॉलोनियों के बाहर बड़े-बड़े चेतावनी बोर्ड टांग दिए हैं. कई जगहों पर तो गुस्साए और डरे हुए स्थानीय लोगों ने इन सरकारी बोर्डों को उखाड़ भी फेंका है. उनका कहना है कि वे यहाँ दशकों से रह रहे हैं, तो अब अचानक उनके आशियाने अवैध कैसे हो गए?

बुराड़ी-जगतपुर में मलबे में तब्दील हुईं इमारतें

यह डर सिर्फ हवाई नहीं है, क्योंकि बुराड़ी से जगतपुर गांव की तरफ जाने वाले रास्ते पर प्रशासन का दस्ता जेसीबी मशीनों के साथ पहुंच चुका है. यहाँ तेजी से बढ़ रहे कई नए अवैध निर्माणों, पिलर्स और लोहे के गेटों को जमींदोज कर दिया गया है. कभी जहाँ चहल-पहल थी, वहाँ अब सिर्फ सीमेंट का मलबा और सरिए नजर आ रहे हैं.

इस कार्रवाई की आंच राजनीति तक भी पहुंच गई है. ‘आप’ के स्थानीय पार्षद गगन चौधरी ने दावा किया है कि प्रशासन ने दुर्भावना के तहत उनकी करीब 50 लाख रुपये की निजी संपत्ति को ढहा दिया. उनके पिता कुलदीप चौधरी का कहना है कि यह जमीन 40 साल पुरानी है, लेकिन पुलिस और प्रशासन मनमानी पर उतारू हैं.

सीएम रेखा गुप्ता का आश्वासन: ‘पुराने मकान सुरक्षित’

मामले की संवेदनशीलता और लोगों के बढ़ते गुस्से को देखते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जनता को शांत करने की कोशिश की है. मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि इस ओ-जोन क्षेत्र में वर्षों से बने पुराने मकानों को बिल्कुल नहीं छुआ जाएगा, इसलिए पैनिक करने की जरूरत नहीं है. सरकार की कार्रवाई सिर्फ और सिर्फ नए हो रहे कमर्शियल और अवैध निर्माणों को रोकने के लिए है. बहरहाल, सीएम के भरोसे के बावजूद जमीनी स्तर पर लोगों की चिंताएं कम नहीं हुई हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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