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दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में महिलाओं के 33% आरक्षण की मांग, SC ने दिया समाधान निकालने का निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में महिलाओं के आरक्षण की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बार एसोसिएशन से अगले हफ्ते तक समाधान निकालने को कहा है.

Delhi High Court, Child Trafficking

दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन में महिलाओं के आरक्षण की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बार एसोसिएशन से अगले हफ्ते तक समाधान निकालने को कहा है. जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा है कि अगर बार की ओर से कुछ सराहनीय कदम आते हैं तो इससे मदद मिलेगी.

कोर्ट ने यह साफ कर दिया कि चुनाव पर रोक नही लगाई गई है. मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील संजय जैन ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट ने माना है कि DHCBA चुनाव और दिल्ली में सभी ट्रिब्यूनल एसोसिएशन आदि के चुनाव एक ही दिन होने चाहिए. वही वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया ने कहा कि कोई भी बार में महिला सदस्यों का विरोध नही कर रहा है, लेकिन इसका इस्तेमाल चुनाव टालने के साधन के रूप में नही किया जाना चाहिए.

19 दिसंबर को अगली सुनवाई

हंसारिया ने यह भी कहा कि दिल्ली के बार निकायों में महिला वकीलों के लिए आरक्षण की मांग वाली याचिकाओं का उल्लेख किया है. कोर्ट 19 दिसंबर को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. यह याचिका वकील शोभा गुप्ता ने दायर की थी. याचिका में दिल्ली की बार एसोसिएशन में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण की मांग की गई थी. याचिका में कहा गया है कि बार एसोसिएशंस में महिलाओं की कम भागीदारी से उनके अधिकार प्रभावित होते है.

33 फीसदी आरक्षण का आदेश

शोभा गुप्ता ने इसके पहले दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. लेकिन हाई कोर्ट द्वारा सुनवाई टाले जाने के बाद शोभा गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का आदेश दिया था.

DHCBA में एक भी महिला अध्यक्ष या सचिव नहीं

याचिका में यह भी कहा गया है कि 1962 से अब तक DHCBA में एक भी महिला अध्यक्ष या सचिव नही रही है. इसमें यह भी उल्लेख किया गया कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन अपनी कार्यकारी समिति की 1/3 सीटे और एक पदाधिकारी पद महिलाओं के लिए आरक्षित करता है, जिसमें 2024-25 के चुनावों में कोषाध्यक्ष का पद भी महिलाओं के लिए आरक्षित है.

-भारत एक्सप्रेस



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