भारतीय लोकतंत्र की जमीन पर राजनीतिक टकराव अब सिर्फ संसद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि वह खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगा है. कथित वोट चोरी और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस पार्टी ने दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान (Ramlila Maidan) में एक विशाल “वोट चोर, गद्दी छोड़ो” महा रैली का आयोजन किया. इस रैली में देशभर से आए हजारों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि विपक्ष इस मुद्दे को लेकर अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है.
सच बनाम झूठ की लड़ाई
रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे केवल एक राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि ‘सच बनाम झूठ की लड़ाई’ बताया. उनके अनुसार यह संघर्ष सत्ता परिवर्तन से कहीं आगे बढ़कर लोकतंत्र और संविधान को बचाने की लड़ाई है. राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया में सत्ता का दुरुपयोग किया गया और जब इन आरोपों पर सवाल उठाए गए तो निर्वाचन आयोग ने चुप्पी साध ली. उनका कहना था कि यदि लोकतंत्र के सबसे अहम स्तंभ (स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव) पर ही जनता का भरोसा डगमगाने लगे, तो यह पूरे लोकतांत्रिक ढांचे के लिए खतरनाक संकेत है.
लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई रहेगी जारी: राहुल गांधी
राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का हमला केवल सरकार तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाया कि वे मिलकर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रहे हैं. उनका स्पष्ट संदेश था कि कांग्रेस इस लड़ाई में पीछे हटने वाली नहीं है और वह हर स्तर पर लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी.
बीजेपी में जाकर वॉशिंग मशीन में धुलकर साफ हो गए
रैली में प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) ने भी केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया. उन्होंने राजनीतिक दबाव और केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाते हुए कहा कि चुनावों से पहले विपक्षी नेताओं, यहां तक कि मुख्यमंत्रियों को जेल में डालना, कांग्रेस के बैंक खाते फ्रीज करना और भ्रष्टाचार के मामलों में चयनात्मक कार्रवाई करना, एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है. उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, ‘जो बीजेपी में गए, वे वॉशिंग मशीन में धुलकर साफ हो गए’. ये सत्ताधारी दल पर राजनीतिक अवसरवाद और दोहरे मापदंडों का सीधा आरोप था.
प्रियंका गांधी ने संसद के भीतर की कार्यवाही का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि जब संसद में मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने SIR और वोट चोरी का मुद्दा उठाया, तो सरकार ने इस पर चर्चा से बचने का प्रयास किया. उनके अनुसार, सरकार ने पहले “वंदे मातरम्” पर चर्चा की बात कही, लेकिन जनता से जुड़े मूल सवालों पर बहस करने की इच्छाशक्ति नहीं दिखाई. यह रवैया, उनके शब्दों में, लोकतांत्रिक जवाबदेही से बचने का उदाहरण है.
लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने का माध्यम नहीं
कांग्रेस इस रैली के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि संस्थाओं की निष्पक्षता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जनता की आवाज को सम्मान देने की प्रक्रिया है.
आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि इस आंदोलन का राजनीतिक असर क्या होता है. लेकिन इतना स्पष्ट है कि रामलीला मैदान से उठा यह स्वर केवल एक दिन की रैली तक सीमित नहीं रहेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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