Cloudburst In Himachal Pradesh: हिमाचल प्रदेश में मानसून (Monsoon 2025) का अंतिम दौर विनाशकारी साबित हो रहा है. बीती रात बिलासपुर जिले के नम्होल क्षेत्र में बादल फटने (Cloudburst) की घटना ने इलाके में कोहरम मचा दिया. TOI की रिपोर्ट के अनुसार, नैनादेवी विधानसभा क्षेत्र के गुत्राहन गांव में भारी बारिश (Rainfall) के बाद बादल फटने से मलबा और पानी की धारा ने 10 से अधिक वाहनों को मलबे में दबा दिया. कई कृषि भूमियां नष्ट हो गईं, जबकि सड़कें बह गईं.
स्थानीय निवासी कश्मीर सिंह ने बताया कि तेज बहाव ने मिट्टी और मलबे को खेतों में घुसेड़ दिया, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ. हालांकि, कोई हताहत नहीं होने की सूचना है, लेकिन कई घर क्षतिग्रस्त हो गए. राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (एसईओसी) के मुताबिक, हालिया बाढ़ (Floods) और भूस्खलन से 953 बिजली ट्रांसफॉर्मर और 336 जल आपूर्ति योजनाएं प्रभावित हुई हैं.

मंडी जिले में भूस्खलन, कुल्लू, सोलन और ऊना भी प्रभावित
शनिवार सुबह 4 बजे मंडी जिले के धर्मपुर क्षेत्र के सपड़ी रोह गांव में भूस्खलन की घटना ने स्थिति को और गंभीर बना दिया. न्यू इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, मलबे की चपेट में कई घर आ गए, जिसके चलते 8 परिवारों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया गया. सड़कें पूरी तरह बह गईं, और राहत कार्य जारी हैं. हिमाचल में मानसून शुरू होने (20 जून) से 12 सितंबर तक 386 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 218 बरसात-संबंधी घटनाओं से और 168 सड़क हादसों से हुईं. राज्य को अब तक 4,465 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. एनडीटीवी की रिपोर्ट में उल्लेख है कि कुल्लू, सोलन और ऊना जैसे जिलों में भी भारी तबाही हुई है, जहां सड़कें अवरुद्ध हैं और स्कूल बंद कर दिए गए हैं.
अधिक वर्षा से आईं आपदा, राज्य में 43% अतिरिक्त बारिश
इस मानसून सीजन में हिमाचल ने सामान्य से 43% अधिक बारिश दर्ज की है. एक जून से 12 सितंबर तक सामान्य 678.4 मिमी के मुकाबले 967.2 मिमी वर्षा हुई. सितंबर के पहले 12 दिनों में सामान्य 64.6 मिमी के विपरीत 150.4 मिमी (133% अधिक) बारिश हुई. शिमला में 231 मिमी अतिरिक्त, कुल्लू में 363 मिमी, सोलन में 256 मिमी और ऊना में 241 मिमी ज्यादा वर्षा दर्ज की गई. द इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, यह अतिरिक्त वर्षा भूस्खलन और बाढ़ का प्रमुख कारण बनी है. राज्य में 55 फ्लैश फ्लड, 28 बादल फटने और 48 बड़े भूस्खलन घटित हो चुके हैं.

उत्तर भारत में बाढ़ का प्रकोप, यूपी सबसे ज्यादा प्रभावित
यूपी के उन्नाव में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 23 सेमी ऊपर है, जिससे 80 गांव बाढ़ की चपेट में हैं. 100 से अधिक परिवार बेघर हो गए. फर्रुखाबाद में नदी कटाव तेज होने से ग्रामीण खुद मकान तोड़कर ईंट-सरिया बचा रहे हैं. पंजाब, कश्मीर, राजस्थान और सिक्किम में भी भूस्खलन और बाढ़ की घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं.
मानसून की फिर से दस्तक और वापसी का पूर्वानुमान
इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 24 मई को केरल में दस्तक दी, जो 2009 के बाद 8 दिन जल्दी थी. 29 जून तक पूरे देश में फैल गया, जो सामान्य 8 जुलाई से 9 दिन पहले है. आईएमडी के अनुसार, देश में अब तक 836.2 मिमी वर्षा (सामान्य 778.6 मिमी से 7% अधिक) हो चुकी. उत्तर-पश्चिम भारत में 720.4 मिमी (34% अधिक). एक अध्ययन बताता है कि पिछले 50 वर्षों में मानसून अवधि हर दशक में 1.6 दिन लंबी हुई है.
सितंबर में सामान्य से अधिक वर्षा होने का अनुमान
एक्सर्ट्स के मुताबिक, मानसून की वापसी 15 सितंबर से पश्चिमी राजस्थान से शुरू हो सकती है, जो सामान्य 17 सितंबर से थोड़ी जल्दी है. पूरी वापसी 15 अक्टूबर तक संभव. आईएमडी ने सितंबर में सामान्य से अधिक वर्षा का अनुमान लगाया है, जिससे राहत कार्य चुनौतीपूर्ण रहेंगे. यह मानसून जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को दर्शाता है, जहां अतिवृष्टि आपदाओं को बढ़ा रही है.
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