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NEET से लेकर 2G तक… भारत में आंदोलनों के आगे कब-कब झुके मंत्री?

Indian Ministers Resignations: नीट पेपर लीक विवाद और छात्रों के बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया. भारतीय राजनीति में यह पहली बार नहीं है जब दबाव और आंदोलनों के चलते किसी मंत्री को पद छोड़ना पड़ा हो.

Indian Ministers Resignations: देशभर में छात्रों के गुस्से और लगातार विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पद छोड़ दिया. कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन और नीट पेपर लीक विवाद ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया था. इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा. सरकार ने साथ ही पेपर लीक रोकने के लिए कानून को और सख्त बनाने का ऐलान किया.

दबाव में इस्तीफे की परंपरा

भारतीय राजनीति में यह पहली बार नहीं है कि किसी मंत्री ने आंदोलन या जनदबाव के चलते इस्तीफा दिया हो. रेल हादसों, भ्रष्टाचार, किसानों के आंदोलन और सुरक्षा चूक जैसी घटनाओं ने कई बार मंत्रियों को पद छोड़ने पर मजबूर किया है.

लाल बहादुर शास्त्री का उदाहरण

1956 में तमिलनाडु के अरियालुर रेल हादसे में 140 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी. उस समय रेल मंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया. यह घटना आज भी भारतीय राजनीति में जवाबदेही की मिसाल मानी जाती है.

अश्विनी कुमार का इस्तीफा

2013 में तत्कालीन कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने कोलगेट मामले में सीबीआई रिपोर्ट पर विवाद के चलते पद छोड़ा. सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और विपक्ष के दबाव के बीच उन्होंने कहा कि वह अनावश्यक विवाद खत्म करने के लिए इस्तीफा दे रहे हैं.

ए राजा और 2जी घोटाला

2010 में दूरसंचार मंत्री ए राजा ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के चलते इस्तीफा दिया. उन्होंने डीएमके प्रमुख करुणानिधि की सलाह पर सरकार को असहज स्थिति से बचाने के लिए पद छोड़ा, हालांकि उन्होंने आरोपों से इनकार किया.

शिवराज पाटिल और मुंबई हमला

2008 के मुंबई आतंकी हमले में 166 लोगों की मौत के बाद गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने इस्तीफा दिया. सुरक्षा चूक और जनता के गुस्से ने उन्हें पद छोड़ने पर मजबूर किया.

नीतीश कुमार का कदम

1999 में पश्चिम बंगाल के गैसल रेल हादसे में करीब 290 लोगों की मौत हुई. तत्कालीन रेल मंत्री नीतीश कुमार ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया.

टी. टी. कृष्णमाचारी और मुंद्रा घोटाला

1958 में वित्त मंत्री टी. टी. कृष्णमाचारी ने मुंद्रा घोटाले के बाद पद छोड़ा. एलआईसी द्वारा घाटे वाली कंपनियों के शेयर खरीदने के मामले ने बड़ा विवाद खड़ा किया था.

केशव देव मालवीय का इस्तीफा

1963 में पेट्रोलियम मंत्री केशव देव मालवीय ने खनन लाइसेंस में पक्षपात के आरोपों के चलते पद छोड़ा.

ललित नारायण मिश्रा

रेल मंत्री ललित नारायण मिश्रा पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. बाद में वह दोबारा मंत्रिमंडल में लौटे, लेकिन 1975 में समस्तीपुर में बम विस्फोट में उनकी मौत हो गई.

पवन कुमार बंसल

2013 में रेल मंत्री पवन कुमार बंसल ने इस्तीफा दिया जब उनके भांजे को रिश्वत मामले में पकड़ा गया.

एम जे अकबर और MeToo

2018 में विदेश राज्य मंत्री एम जे अकबर ने यौन उत्पीड़न के आरोपों के चलते पद छोड़ा. MeToo अभियान के दौरान कई महिला पत्रकारों ने उन पर आरोप लगाए थे.

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धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा दिखाता है कि भारत में जनदबाव और आंदोलनों का असर कितना गहरा होता है. चाहे रेल हादसे हों, भ्रष्टाचार के मामले हों या छात्रों का गुस्सा, मंत्रियों को कई बार पद छोड़ना पड़ा है. यह घटनाएँ भारतीय राजनीति में जवाबदेही और दबाव की ताकत को उजागर करती हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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