Dhule Mayor Mayadevi Pardeshi News: अभिषेक पांडे/धुले: अक्सर सत्ता मिलते ही नेताओं का रहन-सहन बदल जाता है. सायरन वाली गाड़ियां और वीआईपी प्रोटोकॉल उनकी पहचान बन जाते हैं. लेकिन महाराष्ट्र के धुले (Dhule) में एक अलग ही तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे शहर का दिल जीत लिया है. धुले महानगरपालिका की नवनिर्वाचित महापौर मायादेवी परदेशी (Mayadevi Pardeshi) ने वीआईपी कल्चर (VIP Culture) को सिरे से खारिज करते हुए सादगी की नई इबारत लिखी है.
सरकारी गाड़ी को कहा ‘ना’ (Dhule Mayor Mayadevi Pardeshi)
बीजेपी (BJP) की नवनिर्वाचित मेयर मायादेवी ने पदभार संभालते ही सरकारी चार पहिया वाहन लेने से साफ इनकार कर दिया. वे अपने घर से महानगरपालिका कार्यालय तक अपनी निजी दोपहिया वाहन से पहुंचीं. उनका कहना है कि जनता की सेवा करने के लिए वीआईपी सुविधाओं की नहीं, बल्कि उनके बीच जाने की जरूरत है.
दिव्यांगों को समर्पित किया भत्ता
मायादेवी ने सिर्फ गाड़ी ही नहीं ठुकराई, बल्कि मेयर पद के साथ मिलने वाले सभी भत्तों को समाज सेवा में लगाने का फैसला किया है. उन्होंने घोषणा की है कि उनका वाहन भत्ता, चाय-पानी का खर्च और मेयर पद की निधि का उपयोग अंधे, दिव्यांग, विकलांग और मानसिक रूप से कमजोर बच्चों के कल्याण के लिए किया जाएगा.
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2003 के बाद पहली बार
धुले म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (Dhule Municipal Corporation) के इतिहास में 2003 से अब तक कई मेयर चुने गए, लेकिन मायादेवी परदेशी पहली ऐसी मेयर हैं जिन्होंने वीआईपी सुविधाओं को त्यागा है. वे धुले की पांचवीं महिला मेयर हैं. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने मुझे सेवा का मौका दिया है, मैं धुले के विकास के लिए हर संभव प्रयास करूंगी. उनके इस पहल की चर्चा देशभर में हो रही है. लोग कह रहे हैं कि उनसे देश के नेताओं को कुछ सीखना चाहिए.
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