देश के करीब 11 राज्यों में 40 से ज्यादा आश्रय स्थल चलाकर 80 हजार से ज्यादा पशुओं की देखभाल करने वाली संस्था ‘ध्यान फाउंडेशन’ आज खुद गंभीर संकट के मुहाने पर आ खड़ी हुई है. पिछले दो दशकों से पशु सेवा और संरक्षण का काम कर रही इस संस्था ने आरोप लगाया है कि उनके आश्रय स्थलों, स्वयंसेवकों और कर्मचारियों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है. मामला अब गोवा की गौशाला पर हुए हमले के बाद अदालती चौखट तक पहुंच गया है.
गोवा गौशाला विध्वंस और FIR का मामला
विवाद की मुख्य वजह गोवा स्थित ‘न्यू जांबाउलिम गौशाला’ में हुई एक हिंसक घटना बनी. फाउंडेशन का आरोप है कि 22 जुलाई 2026 की रात लगभग 150 लोगों की भीड़ ने बुलडोजर चलाकर पूरी गौशाला को तहस-नहस कर दिया. इस दौरान वहां मौजूद 304 गौवंश खतरे में पड़ गए.
इस मामले में दर्ज FIR में मंदिर समिति के अध्यक्ष, बिल्डर और कर्मचारियों के नाम आरोपी के तौर पर शामिल हैं. संस्था का दावा है कि जबरन ले जाए गए गौवंश को देखने के लिए भी उन्हें हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी. कर्मचारियों को लगातार जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं और उन्हें स्थानीय इलाकों में ‘बाहरी’ बताकर हिंसा भड़काने की कोशिश हो रही है.
BSF का 10 करोड़ बकाया
सुरक्षा की चुनौतियों के साथ-साथ संस्था के सामने भारी आर्थिक तंगी का संकट भी गहरा गया है. ध्यान फाउंडेशन पिछले आठ सालों से भारत-बांग्लादेश सीमा पर मवेशी तस्करी रोकने के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) के साथ मिलकर काम कर रहा है.
संस्था के अनुसार, BSF द्वारा बचाए गए गौवंश को गौशालाओं तक पहुंचाने का 10 करोड़ रुपये से अधिक का परिवहन खर्च पिछले तीन सालों से अटका हुआ है. समझौते (MoU) के तहत इस रकम की प्रतिपूर्ति नहीं हुई है. वहीं, 80 हजार गौवंश के पेट भरने के लिए रोजाना करीब 6 लाख 40 हजार किलो चारे की जरूरत होती है. अब तक पशु सेवा पर 350 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च कर चुकी संस्था के पास अब चारे, कर्मचारियों और गाड़ियों के रखरखाव का फंड खत्म हो रहा है.
सरकार और प्रशासन से सुरक्षा की मांग
संस्था का कहना है कि पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों में मवेशियों को ले जाने वाले वाहनों पर माफिया तत्वों द्वारा हमला किया जाता है. ध्यान फाउंडेशन ने सरकार और प्रशासन से लंबित 10 करोड़ रुपये के भुगतान को जल्द जारी करने और कार्यकर्ताओं को सुरक्षा देने की गुहार लगाई है. अब देखना यह होगा कि 80 हजार बेजुबानों की जिंदगी से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर प्रशासन क्या कदम उठाता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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