प्रवर्तन निदेशालय (ED) चंडीगढ़ जोनल कार्यालय ने 26 अगस्त को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत 9.31 करोड़ रुपए की संपत्तियों को अटैच कर लिया है.
किसकी है संपत्ती?
ये संपत्तियां क्यूएफएक्स/वाईएफएक्स/यॉर्करएफएक्स/बॉटब्रो घोटाले के मुख्य आरोपी नवाब उर्फ लैविश चौधरी, उसके सहयोगी राजेंद्र कुमार सूद और अन्य एजेंटों व उनके परिजनों की बताई जा रही हैं.
अटैच संपत्तियों में क्या-क्या?
ईडी ने जिन संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है, उनमें 45 अचल संपत्तियां शामिल हैं. इनमें आवासीय फ्लैट, प्लॉट और कृषि भूमि सम्मिलित हैं जो उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में फैली हुई हैं.
इसके अलावा, बैंक बैलेंस के रूप में चल संपत्तियां भी जब्त की गई हैं. जांच में सामने आया है कि 2019 से 2025 के बीच हुए इस घोटाले के दौरान अपराध से अर्जित धन को कई बैंक खातों के जरिये घुमाकर इन संपत्तियों में निवेश किया गया. अक्सर इन खातों को आरोपियों के रिश्तेदारों और सहयोगियों के नाम से संचालित किया गया ताकि काले धन के स्रोत को छिपाया जा सके.
ED ने अपने आदेश में क्या बताया?
ईडी की ओर से जारी आदेश में बताया गया है कि यह घोटाला एक पोंजी और मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) स्कीम के रूप में संचालित किया गया. क्यूएफएक्स ग्रुप ने निवेशकों को 5–6 प्रतिशत मासिक रिटर्न का झांसा देकर धन इकट्ठा किया, जबकि वास्तव में कोई विदेशी मुद्रा (फॉरेक्स) ट्रेडिंग नहीं की गई. निवेशकों से प्राप्त राशि को अलग-अलग बैंक खातों में लेयरिंग के जरिये डाला गया और बाद में आरोपियों व उनके परिजनों के नाम पर चल रही कंपनियों और संपत्तियों में निवेश कर दिया गया.
किसके नामों पर खरीदी गई संपत्ती
ये धनराशि क्यूएफएक्स ग्रुप की संस्थाओं के खातों से होकर आरोपियों, उनके एजेंटों और परिवारजनों जैसे केवल किशन, दिनेश कुमार चोपड़ा, चमन लाल, साजिद अली, राशिद अली आदि के खातों में पहुंची. इसके बाद इन्हीं पैसों से आरोपियों की पत्नियों, बेटों और रिश्तेदारों के नाम पर संपत्तियां खरीदी गईं.
कब हुई थी छापेममारी?
यह कार्रवाई ईडी की पहले की जांच का ही हिस्सा है. 11 फरवरी 2025 और 4 जुलाई 2025 को ईडी ने देशभर में क्यूएफएक्स ग्रुप से जुड़ी कंपनियों, प्रमोटरों और एजेंटों के ठिकानों पर छापेमारी की थी. उस दौरान 194 बैंक खातों को चिन्हित किया गया था, जिनमें 394 करोड़ रुपए की संदिग्ध रकम मिली थी. यह रकम भी अपराध से अर्जित धन को घुमाने का हिस्सा पाई गई.
किस-किस राज्यों में दर्ज है मामला?
क्यूएफएक्स ग्रुप के खिलाफ हिमाचल प्रदेश, असम, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा सहित कई राज्यों में एफआईआर दर्ज हैं. ये मामले भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और प्राइज चिट्स एवं मनी सर्कुलेशन स्कीम (प्रतिषेध) अधिनियम के तहत दर्ज किए गए हैं.
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ED ने क्या कहा?
इस बार अटैच की गई संपत्तियों में 8.20 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति (27 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल) और 1.1 करोड़ रुपए की चल संपत्ति शामिल है. ईडी का कहना है कि यह कार्रवाई घोटाले की वित्तीय जड़ को तोड़ने की दिशा में एक और अहम कदम है और इससे अब तक की जांच और जब्ती की प्रक्रिया को मजबूती मिली है.
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-भारत एक्सप्रेस
(साभार IANS न्यूज एजेंसी)
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