Fake Medicine Racket in Nawada: बिहार के नवादा जिले में नकली दवाओं के एक बड़े रैकेट का भयानक खेल उजागर हुआ है. पुलिस ने थाली थाना इलाके में कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में नकली दवाएं, उनके रैपर और निर्माण सामग्री जब्त की है. यह कार्रवाई ब्रांड प्रोटेक्शन सर्विसिंग प्राइवेट लिमिटेड और पटना के फील्ड ऑफिसर मोहम्मद सदाउल्लाह के साझा प्रयास से हुई है. नकली दवाओं के अवैध कारोबार के इस सनसनीखेज खुलासे से इलाके में हड़कंप मच गया है. यह घटना न केवल स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए बड़ा कदम है बल्कि हजारों मरीजों की जिंदगी बचाने वाली साबित हो सकती है.
किन नकली दवाओं को जब्त किया?
पुलिस ने लोकप्रिय ब्रांडों की नकली दवाओं की बड़ी खेप बरामद की है. इनमें शामिल हैं:
- एमरोल स्टेस लोशन (70 मिलीलीटर) की 2418 बोतलें
- निग्रेल 2 सॉल्यूशन (30 मिलीलीटर) की 5909 बोतलें
- लिव 52 सिरप (100 मिलीलीटर) की 2215 बोतलें
- इबुजेसिक प्लस सिरप (100 मिलीलीटर) की 3765 बोतलें
वहीं इसके अलावा पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले हजारों रैपर भी जब्त किए गए हैं. इनमें एमरोल स्टार लोशन (30 मिलीलीटर) के 1245 शीट, निजल 2 सॉल्यूशन (30 मिलीलीटर) के 1245 शीट, लिव 52 सिरप के 615 शीट और इबुजेसिक प्लस (100 मिलीलीटर) के 415 शीट शामिल हैं.
दवाओं के साथ अन्य सामग्री भी बरामद
पुलिस ने नकली दवाओं के निर्माण के लिए इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी जब्त की है. इनमें 1915 बॉक्स शेलेल एक्सटी टैबलेट, 50 किलोग्राम कच्चा माल, 3413 खाली बोतलें और 2815 कैप शामिल हैं. प्रभारी थानाध्यक्ष चांदनी कुमारी ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है. आगे की जांच जारी है. सभी जब्त सामान थाना परिसर में सुरक्षित रखा गया है.
कैसे चल रहा था गिरोह का खेल?
बता दें कि ये फर्जी रैकेट ब्रांड प्रोटेक्शन सर्विसिंग प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर चल रहा था. जिसमें नकली दवाओं की री-पैकिंग कर बाजार में खपाई जा रही थी. पुलिस का मानना है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था. जांच में अब तक कई बड़े खुलासे हो चुके हैं. जिसके बाद पुलिस अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है.
इतने दिनों तक कैसे चलता रहा धंधा?
नकली दवाओं से लीवर, स्किन और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं प्रभावित थीं. इन दवाओं का सेवन करने वाले मरीजों को जानलेवा खतरा था. पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे केवल लाइसेंस प्राप्त दुकानों से दवाएं खरीदें और संदिग्ध दवाओं की जानकारी तुरंत दें .यह कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग और पुलिस के लिए बड़ी सफलता है. लेकिन सवाल यह है कि इतने बड़े रैकेट का खेल इतने दिनों तक कैसे चलता रहा? जांच में अब तक के खुलासे से साफ है कि नकली दवाओं का नेटवर्क बहुत बड़ा है. पुलिस को पूरे गिरोह का भंडाफोड़ करना होगा ताकि आम लोगों की जान बचाई जा सके.
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-भारत एक्सप्रेस
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