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नीदरलैंड, डेनमार्क और जर्मनी की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे विदेश मंत्री एस जयशंकर, इन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा

विदेश मंत्री एस जयशंकर जल्द ही नीदरलैंड, डेनमार्क और जर्मनी की यात्रा करेंगे. वे इन देशों के नेताओं से मिलेंगे और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा करेंगे. आपसी हित के वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी बात होगी.

S Jaishankar

S Jaishankar: विदेश मंत्री एस. जयशंकर 19 से 24 मई तक नीदरलैंड, डेनमार्क और जर्मनी की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे. विदेश मंत्रालय की ओर से रविवार को यह जानकारी दी गई. इस यात्रा के दौरान विदेश मंत्री तीनों देशों के नेतृत्व से मुलाकात करेंगे और द्विपक्षीय संबंधों के संपूर्ण दायरे पर चर्चा करेंगे. इसके अलावा वैश्विक और क्षेत्रीय मामलों पर भी विचार-विमर्श होगा, जो आपसी हित से जुड़े हैं.

नए जर्मन चांसलर से मुलाकात की संभावना

जर्मनी दौरा ऐसे समय हो रहा है जब फ्रेडरिक मर्ज ने मई 2025 की शुरुआत में देश के नए फेडरल चांसलर का पद संभाला है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें इस जिम्मेदारी के लिए बधाई दी थी और भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की इच्छा जाहिर की थी. प्रधानमंत्री मोदी ने X पर लिखा, ” @_FriedrichMerz को जर्मनी के फेडरल चांसलर बनने पर हार्दिक बधाई. मैं आपके साथ मिलकर भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने को लेकर उत्साहित हूं.”

पाहलगाम आतंकी हमले पर समर्थन

तीनों देश हाल ही में हुए कायरतापूर्ण पाहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा कर भारत के साथ एकजुटता जता चुके हैं. डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने हमले की निंदा की और पीड़ितों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की. वहीं, पूर्व जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज़ और नीदरलैंड्स के राष्ट्रपति डिक स्कोफ ने भी हमले पर दुख जताते हुए भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आतंकवाद से लड़ने का संकल्प दोहराया.

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भारत के संबंध तीनों देशों से मजबूत

भारत और डेनमार्क के संबंध ऐतिहासिक, लोकतांत्रिक मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय शांति की साझी सोच पर आधारित हैं. दोनों देशों के बीच “ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” के तहत सहयोग बढ़ रहा है. भारत-नीदरलैंड्स के राजनयिक संबंधों को 75 साल से अधिक समय हो चुका है ये दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और व्यापारिक संबंध काफी मजबूत हैं.

उच्च स्तरीय द्विपक्षीय यात्राओं ने इस बहुआयामी साझेदारी को नई गति दी है. भारत और जर्मनी के बीच रणनीतिक साझेदारी है. भारत द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जर्मनी से राजनयिक संबंध स्थापित करने वाला पहला देश था.

-भारत एक्सप्रेस 



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