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Foreign Minister S. Jaishankar

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के जन्मदिन पर उन्हें खास अंदाज में बधाई दी. पीएम ने जयशंकर को एक कुशल डिप्लोमैट बताते हुए भारतीय विदेश नीति को दुनिया भर में मजबूत करने के लिए उनके योगदान की सराहना की.

फ्रांस से राफेल खरीदने के बाद भारत में सोशल मीडिया पर काफी खुशी देखने को मिली थी. यह पहली बार था जब राफेल सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म पर एक चर्चा का विषय बन चुका था.

एस जयशंकर ने कहा कि दुनिया को ऐसा कोई अमेरिकी राष्ट्रपति कभी नहीं मिला जिसने विदेश नीति को वर्तमान राष्ट्रपति जितना सार्वजनिक रूप से संचालित किया हो.

विदेश मंत्री जयशंकर ने एससीओ समिट पर कहा कि राजनाथ सिंह का सही मत था कि बिना आतंकवाद के उल्लेख के ( वो भी तब जब संगठन का मुख्य उद्देश्य आतंकवाद से लड़ना है) वे इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे.

पारुल यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए एस. जयशंकर ने कहा, "हमारे संसाधन सीमित हो सकते हैं, लेकिन भारत का दिल हमेशा बड़ा रहा है. यही कारण है कि अभी भी एक विकासशील देश होने के नाते, हमने विभिन्न महाद्वीपों के 78 देशों में 600 से अधिक विकास परियोजनाएं शुरू की हैं. "

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 19-20 मई 2025 को नीदरलैंड का आधिकारिक दौरा किया, जिसमें रणनीतिक साझेदारी, वैश्विक सहयोग और आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता पर जोर दिया गया.

विदेश मंत्री एस जयशंकर जल्द ही नीदरलैंड, डेनमार्क और जर्मनी की यात्रा करेंगे. वे इन देशों के नेताओं से मिलेंगे और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा करेंगे. आपसी हित के वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी बात होगी.

भारत दौरे पर पहुंचे ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को द्विपक्षीय बैठक की. इस बैठक में विदेश मंत्री जयशंकर ने भारतीय सेना की तरफ से की गई एयर स्ट्राइक के बारे में जानकारी दी.

मस्कट में हुई बैठक के बाद एस जयशंकर कहा कि बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के विदेश मामलों के सलाहकार के साथ बातचीत द्विपक्षीय संबंधों और बिम्सटेक (BIMSTEC) पर केंद्रित थी.

विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar) ने शनिवार (15 फरवरी) को जर्मनी में 61वें म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन (MSS) के मौके पर कई महत्वपूर्ण बैठकें कीं. इनमें नॉर्वे के पूर्व प्रधानमंत्री और उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) के पूर्व महासचिव का पद संभाल चुके जेन्स स्टोलटेनबर्ग के साथ मीटिंग शामिल थी.