Global Oil Crisis India preparation PM Modi: ईरान-इजरायल युद्ध जैसे जैसे परवान चढ़ रहा वैसे वैसे ही दुनियां में तेल के काले बादल भी छाते जा रहे हैं. हमारे पड़ोसी देश ने तो बीते दिन ही अपने यहां तेल की बचत के लिए वर्क फ्राम होम जैसे तमाम बड़े कदमों को पाकिस्तान में लागू कर दिया है. लेकिन अब तेल की चपेट में भारत के आने की भी संभावनाएं बढ़ रही हैं. इस बीच देश के पीएम नरेंद्र मोदी ने देश की ऊर्जा सुरक्षा और आम आदमी की जेब को बचाने के लिए मोर्चा संभाल लिया है.
नई दिल्ली में आज पीएम मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई जिसमें कई अहम फैसले लिए गए . प्रधानमंत्री ने मंत्रियों को स्पष्ट संदेश दिया कि अंतरराष्ट्रीय संकट का बोझ आम नागरिकों पर नहीं पड़ना चाहिए. इस दौरान उन्होंने खासतौर पर महंगाई, ईंधन आपूर्ति और जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता पर सतर्क रहने को कहा है.
‘आम आदमी को राहत का वादा’
पीएम मोदी ने स्पष्ट संदेश दिया कि ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करनी है और आम आदमी की जेब सुरक्षित रखनी है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत ने कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति में बड़ा बदलाव किया है. अब 70% क्रूड ऑयल होर्मुज के अलावा वैकल्पिक रास्तों से आ रहा है, रूस, अमेरिका, वेस्ट अफ्रीका जैसे स्रोत मजबूत हो गए हैं. घरेलू उत्पादन बढ़ाया गया है, सभी रिफाइनरियां फुल क्षमता पर चल रही हैं, और ईरान-इजरायल संघर्ष का इनके ऑपरेशन पर कोई असर नहीं पड़ा.
एलपीजी संकट पर सरकार का फोकस
नई दिल्ली में आयोजित की गई यहां बैठक में आज कमर्शियल और डोमेस्टिक एलपीजी को प्राथमिकता दी गई है. आईओसी, एचपीसीएल और बीपीसीएल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स की 3 सदस्यीय हाई-लेवल कमेटी बनाई गई है, जो रेस्टोरेंट एसोसिएशन से बात कर उनकी जरूरतें पूरी करेगी और सप्लाई को रीप्रायोरिटाइज करेगी. पिछले दिनों घरेलू एलपीजी उत्पादन में 10% की बढ़ोतरी हुई है. नए एलपीजी और एलएनजी कंसाइनमेंट जल्द पहुंच रहे हैं, जिससे स्टॉक मजबूत होगा. रिफाइंड तेल एक्सपोर्ट पर फिलहाल कोई रोक नहीं लगी है.
क्यों पाकिस्तान से बेहतर स्थिति में है भारत ?
बता दें कि पाकिस्तान में फ्यूल सिर्फ 28 दिनों का बचा है, इसलिए वर्क फ्रॉम होम और स्कूल बंद जैसे कदम उठाए गए हैं. लेकिन भारत में पाकिस्तान की तुलना कई गुना अधिक रिजर्व मौजूद है और डायवर्सिफिकेशन से भारत की होर्मुज पर निर्भरता घटकर 40-52% रह गई है. सरकार का दावा है कि हम वैश्विक मुश्किलों से अन्य देशों से बेहतर निकलेंगे, क्योंकि एनर्जी सेक्टर काफी डायवर्स है और आम आदमी पर फोकस है.
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-भारत एक्सप्रेस
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