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आज का समय भारत का स्वर्णिम काल: बदरिया 2026 में शंकराचार्य और तक्षशिला का जिक्र कर CMD उपेंद्र राय ने बताया कैसे?

बदरिया 2026 के मंच से CMD उपेंद्र राय ने कहा कि आज का समय भारत का स्वर्णिम काल है. आदि शंकराचार्य और तक्षशिला का उदाहरण देकर उन्होंने बताया कि भारतीय चेतना को कभी मिटाया नहीं जा सकता.

CMD Upendrra Rai Badariya 2026

“तक्षशिला के पुस्तकालय में आग लगा दी गई और महीनों तक अमूल्य ग्रंथ जलते रहे, लेकिन हमारे मनीषी विचलित नहीं हुए. उन्होंने कहा कि आग केवल पन्नों को जला सकती है, हमारी चेतना और ज्ञान को नहीं. हम इन ग्रंथों को दोबारा रच देंगे.”

भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का यह ऐतिहासिक उदाहरण ‘भारत एक्सप्रेस’ के सीएमडी एवं एडिटर-इन-चीफ उपेंद्र राय ने नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित ‘बदरिया: एक मानसून विदाई महोत्सव 2026‘ के उद्घाटन अवसर पर दिया. उन्होंने 3000 वर्षों के इतिहास का विश्लेषण करते हुए वर्तमान दौर को ‘भारत का स्वर्णिम काल’ करार दिया.

CMD Upendrra Rai Badariya 2026

भारतीय चेतना का पुनरुत्थान

दर्शकों और प्रबुद्धजनों को संबोधित करते हुए सीएमडी उपेंद्र राय ने भारत के संघर्ष और विजय की गाथा सामने रखी. उन्होंने कहा कि भारत ने लगभग 3000 वर्षों की लंबी गुलामी और आक्रांताओं के हमले झेले. दुर्भाग्य यह रहा कि मुट्ठी भर लोग आते रहे और भारत उनकी जंजीरों में बंधता रहा. लेकिन जिस तरह 3000 वर्ष पूर्व आदि शंकराचार्य ने देश के चारों कोनों में जाकर हमारे वेदों, पुराणों, कलाओं, संस्कृति और मंत्रों को पुनर्जीवित किया, ठीक उसी प्रकार आज भारत अपनी सांस्कृतिक चेतना के नए शिखर पर है. आज का समय भारत का स्वर्णिम समय है और हम सब इसके प्रत्यक्ष साक्षी हैं.

विरासत से साकार होगा आधुनिक भारत का सपना

सीएमडी उपेंद्र राय ने जोर देकर कहा कि भारत की ताकत उसकी ज्ञान परंपरा, आत्मिक शुचिता और सनातन चेतना में है. भौतिक संरचनाओं को नष्ट किया जा सकता है, लेकिन जो ज्ञान और संस्कार भारतीयों के डीएनए और लोक परंपराओं में बसे हैं, उन्हें दुनिया की कोई ताकत नहीं मिटा सकती. ‘बदरिया’ जैसे महोत्सव उसी अमर सांस्कृतिक धारा को आधुनिक पीढ़ी के साथ जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं.

CMD Upendrra Rai Badariya 2026

तालकटोरा में लोक संगीत और कजरी की गूंज

‘माता चकेरी देवी फाउंडेशन’ और दिल्ली सरकार की मैथिली-भोजपुरी अकादमी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में लोक कला और संगीत का भव्य संगम देखने को मिला. पद्मश्री मालिनी अवस्थी, प्रिया मल्लिक, चंदन तिवारी, ऋषि सिंह, समृद्ध पाठक और सात्विक पाठक जैसे प्रख्यात कलाकारों ने अपनी ठुमरी, कजरी और लोकगीतों से समां बांध दिया. पूरा स्टेडियम भारतीय संस्कृति के गौरवमयी इतिहास और संगीत के सुरों से गूंज उठा.

बदरिया 2025 से 2026: एक विचार जो बन गया आंदोलन

यह महोत्सव अपने दूसरे वर्ष में प्रवेश कर चुका है. 1 सितंबर 2025 को कनॉट प्लेस में इसके पहले संस्करण की शुरुआत हुई थी, जहां दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और सांस्कृतिक मंत्री कपिल मिश्रा ने शिरकत की थी. तब सीएमडी उपेंद्र राय के मार्गदर्शन में शुरू हुई यह पहल 2026 में तालकटोरा स्टेडियम के विशाल मंच पर राष्ट्रीय उत्सव का रूप ले चुकी है.



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