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डंपिंग जोन बना गोपालगंज सदर अस्पताल, नाले और शौचालय के पानी से बजबजा रहा इमरजेंसी वार्ड

Gopalganj Sadar Hospital: लगभग 38 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बना गोपालगंज का मॉडल सदर अस्पताल आज खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. जिस अस्पताल को जिले भर के लोगों के लिए बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रतीक के रूप में स्थापित किया जाना था, वह आज खुद ‘बीमार’ नजर आ रहा है.

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गोपालगंज मॉडल अस्पताल परिसर में फैली गंदगी (इमेज-Bharat Express)

Gopalganj Sadar Hospital: लगभग 38 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बना गोपालगंज का मॉडल सदर अस्पताल आज खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. जिस अस्पताल को जिले भर के लोगों के लिए बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रतीक के रूप में स्थापित किया जाना था, वह आज खुद ‘बीमार’ नजर आ रहा है. कागजों और दावों में तो मरीजों को यहां इलाज देने का दम भरा जा रहा है, लेकिन धरातल पर स्थितियां इसके बिल्कुल उलट और भयावह हैं.

अस्पताल की इस लचर और खस्ताहाल व्यवस्था की सबसे बड़ी बानगी पूरे परिसर में चारों तरफ फैली गंदगी है. सबसे गंभीर समस्या जल निकासी और सीवरेज सिस्टम की है. अस्पताल परिसर में उचित नाले और जल निकासी की व्यवस्था न होने के कारण शौचालयों और नालियों का बदबूदार पानी खुले मैदानों में ही बहाया जा रहा है.

इमरजेंसी वार्ड के बगल में जमा हुआ गंदा पानी

हालत इस कदर बदतर हो चुके हैं कि इमरजेंसी वार्ड के ठीक बगल में गंदा पानी जमा हो रहा है. खुले में बहते नाली और शौचालय के पानी से उठने वाली भीषण दुर्गंध ने मरीजों, उनके परिजनों, स्वास्थ्यकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों का सांस लेना तक दूभर कर दिया है. मरीज जो पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे होते हैं, उन्हें इस बदबू और संक्रमण फैलने के खतरे के बीच दिन-रात बिताने को मजबूर होना पड़ रहा है. सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जो अस्पताल लोगों को बीमारियां ठीक करने का भरोसा देता है, वही परिसर अब बीमारियों का नया अड्डा बन चुका है.

योजनाएं कागजों तक सिमटी

अस्पताल निर्माण के समय यह योजना बनाई गई थी कि जिस स्थान पर आज जलजमाव और नाले का पानी जमा हो रहा है, वहां इमरजेंसी का एक नया और सुव्यवस्थित गेट बनाया जाएगा. लेकिन निर्माण कार्य पूरा हुए और अस्पताल चालू हुए दो साल से भी ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी यह गेट केवल कागजों में ही सिमट कर रह गया है. आज वह जगह किसी डंपिंग जोन या फिर गंदे पानी के तालाब जैसी दिखाई देती है.

अस्पताल प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारी इस पूरी भयावह स्थिति से भली-भांति वाकिफ होने के बावजूद पूरी तरह से कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं.

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इतने बड़े बजट से निर्मित इस मॉडल अस्पताल की देखरेख में इतनी बड़ी लापरवाही यह दर्शाती है कि आम जनता के स्वास्थ्य और करोड़ों रुपये की सरकारी राशि के सदुपयोग को लेकर प्रशासन कितना उदासीन है.

(भारत एक्सप्रेस के लिए गोपालगंज से अटल बिहारी पाण्डेय की रिपोर्ट)



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