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पीएम मोदी-अदाणी पर बनाए गए वीडियो को डिलीट करे कांग्रेस- मानहानि की शिकायत पर अदालत का फैसला आया

Adani Defamation Case: गुजरात में अदालत ने कांग्रेस को मोदी-अदाणी के डीपफेक वीडियो को 48 घंटे में हटाने का आदेश दिया. वीडियो मानहानिकारक करार दिया गया, अदाणी की शिकायत पर ये संज्ञान लिया गया.

Adani Modi Deepfake Video congress
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

Modi Adani Deepfake Video case: अहमदाबाद की एक अदालत ने कांग्रेस पार्टी और उसके चार नेताओं को सोशल मीडिया से एक डीपफेक वीडियो हटाने का आदेश दिया है. यह वीडियो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उद्योगपति गौतम अदाणी की काल्पनिक बातचीत दिखाता है. अदालत ने इसे मानहानिकारक बताया है.

कांग्रेस के वीडियो में क्या था?

वीडियो 17 दिसंबर को कांग्रेस के एक्स हैंडल पर पोस्ट किया गया था. इसमें मोदी और अदाणी की फर्जी बातचीत दिखाई गई है. कैप्शन था ‘मोदी-अदाणी भाई भाई, देश बेचकर खाई मलाई’. इससे अदाणी कंपनी पर भ्रष्टाचार और देश की संपत्ति बेचने के आरोप लगाए गए थे.

सिविल मानहानि का मुकदमा

अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने सिविल मानहानि का मुकदमा दायर किया. कंपनी ने कहा कि वीडियो में झूठे आरोप लगाए गए हैं जैसे अपराध, भ्रष्टाचार, जमीन हड़पना और राजनीतिक प्रभाव का दुरुपयोग. ये आरोप पूरी तरह गलत और दुर्भावनापूर्ण हैं. इससे कंपनी की साख को बड़ा नुकसान हुआ है.

कोर्ट का आदेश क्या है?

अतिरिक्त सिविल जज श्रीकांत शर्मा की अदालत ने गुरुवार को आदेश दिया. कांग्रेस और उसके नेता जयराम रमेश, सुप्रिया श्रीनेत, पवन खेड़ा और उदय भानू चिब को 48 घंटे में वीडियो हटाना होगा. नहीं हटाने पर एक्स कॉर्प और गूगल को 72 घंटे में हटाने का निर्देश दिया गया है. अगली सुनवाई 29 दिसंबर को होगी.

अदालत ने कहा कि वीडियो में प्रथम दृष्टया मानहानिकारक बयान हैं. सोशल मीडिया पर यह तेजी से फैल सकता है और कंपनी की साख को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है. अदाणी ग्रुप भारत की बड़ी कंपनी है, इसके 10 पब्लिक ट्रेडेड कंपनियां हैं. कोई भी नकारात्मक पोस्ट उसकी छवि खराब कर सकती है. अदालत ने कहा कि साख एक बार खराब हुई तो वापस नहीं आती. इसलिए तुरंत रोक लगाना जरूरी है.

कांग्रेस पर क्या असर पड़ेगा?

यह आदेश कांग्रेस के लिए झटका है. पार्टी अक्सर मोदी-अदाणी रिश्ते पर सवाल उठाती है. लेकिन डीपफेक वीडियो से कानूनी पेचीदगी बढ़ गई है. सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री फैलाना अब महंगा पड़ सकता है.

डीपफेक तकनीक से खतरा

यह मामला डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग को दिखाता है. फर्जी वीडियो से किसी की छवि खराब करना आसान हो गया है. अदालत ने इसे गंभीरता से लिया और तुरंत कार्रवाई की.

अब आगे और क्या होगा?

29 दिसंबर को सुनवाई में दोनों पक्ष अपने तर्क रखेंगे. तब पता चलेगा कि मामला आगे बढ़ता है या नहीं. लेकिन फिलहाल वीडियो हटाना जरूरी है.

न्यूज सोर्स: पीटीआई



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