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आचार्य लोकेश मुनि का इंदौर में प्रेरक संबोधन, तपाभिनन्दन समारोह में मिला आध्यात्मिक ज्ञान

Indore News: इंदौर में जैन आचार्य लोकेश मुनि के संबोधन ने श्रोताओं को भीतर तक झकझोर दिया. तपाभिनन्दन समारोह में आचार्य विश्वरत्नसागरसूरिजी के सान्निध्य में अहिंसा व तप की महिमा का प्रेरक वर्णन किया गया.

Acharya Lokesh Muni
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

Indore News: मध्‍य प्रदेश के इंदौर शहर में एक भव्य तपाभिनन्दन समारोह आयोजित किया गया, जिसमें जैन आचार्य लोकेश मुनि का उद्बोधन श्रोताओं के हृदय को गहराई से छू गया. यह कार्यक्रम पूज्य आचार्य विश्वरत्नसागर सूरिजी के पावन सान्निध्य में संपन्न हुआ, जहां जैन धर्म के अनुयायियों ने तपस्या के महत्व को नमन किया. समारोह का उद्देश्य तपस्वियों का अभिनंदन करना था, जो अहिंसा, सत्य और संयम के मार्ग पर दृढ़ता से चल रहे हैं.

हृदयस्पर्शी उद्बोधन की झलक

आचार्य लोकेश मुनि ने अपने संबोधन में कहा कि तपस्या केवल शरीर की नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि है. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ में हम भूल जाते हैं कि सच्ची शांति वही है जो अहिंसा से उपजी हो. “भीतर की आवाज सुनो, तप ही वह सेतु है जो हमें मोक्ष तक ले जाता है,” उनके शब्दों ने सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया. श्रोता भावुक हो उठे, क्योंकि उद्बोधन ने जीवन की नश्वरता और आध्यात्मिक जागरण पर गहन चिंतन कराया. आचार्य ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि सोशल मीडिया की चकाचौंध में खोने के बजाय, तप का प्रकाश अपनाएं.

जैन मंदिरों से सैकड़ों भक्त उमड़े

इस आयोजन में भजन, कीर्तन और तपस्वियों को सम्मानित करने की रस्में शामिल रहीं. पूज्य विश्वरत्नसागर ने आशीर्वाद देते हुए कहा कि ऐसे समारोह समाज को नैतिक बल प्रदान करते हैं. इंदौर के प्रमुख जैन मंदिरों से सैकड़ों भक्त उपस्थित थे. समारोह का समापन आचार्य जी के प्रेरक श्लोकों से हुआ, जो सभी के मन में अमिट छाप छोड़ गया.

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-भारत एक्सप्रेस 



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