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बड़गाईं जमीन मामले में हेमंत सोरेन पर आरोप गठित, अदालत ने पढ़कर सुनाए आरोप, हेमंत सोरेन का इनकार

Hemant Soren: बड़गाईं की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ बुधवार को रांची की विशेष पीएमएलए अदालत में आरोप गठित कर दिए गए. अदालत ने आरोपों को पढ़कर हेमंत सोरेन को सुनाया.

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बड़गाईं जमीन मामले में हेमंत सोरेन पर आरोप गठित

Hemant Soren: बड़गाईं की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ बुधवार को रांची की विशेष पीएमएलए अदालत में आरोप गठित कर दिए गए. अदालत ने आरोपों को पढ़कर हेमंत सोरेन को सुनाया. सोरेन ने अदालत में लगाए गए आरोपों से इनकार किया है. अब मामले में उनके खिलाफ ट्रायल की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.

इस मामले में हेमंत सोरेन को आरोप गठन के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया. विशेष पीएमएलए अदालत में इससे पहले मामले के अन्य आरोपितों के खिलाफ आरोप गठित किए जा चुके हैं. सोरेन के खिलाफ आरोप गठन की प्रक्रिया पिछले कुछ समय से लंबित थी.

हेमंत सोरेन ने ईडी को उपलब्ध कराये दस्तावेज

दरअसल, 24 सितंबर की सुनवाई में हेमंत सोरेन की ओर से ईडी द्वारा उपलब्ध कराए गए कुछ दस्तावेजों के अध्ययन के लिए समय मांगा गया था. अदालत ने उन्हें छह दिन का समय देते हुए 30 सितंबर को आरोप गठन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए तारीख निर्धारित की थी.

मामला रांची के बड़गाईं अंचल की करीब 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है. प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि जमीन के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर, फर्जी दस्तावेजों और अवैध तरीके से जमीन हासिल करने की प्रक्रिया से जुड़े लेन-देन में मनी लॉन्ड्रिंग हुई. हेमंत सोरेन इन आरोपों से पहले भी इनकार करते रहे हैं.

न्यायिक प्रक्रिया के हिसाब से आगे चलेगी करवाई

अदालत द्वारा आरोप गठित किए जाने के बाद अब मामले की ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. अभियोजन पक्ष अपने साक्ष्य और गवाह अदालत के समक्ष पेश करेगा, जिसके बाद बचाव पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा. आरोप गठित होना आरोपों का न्यायिक रूप से साबित होना नहीं है; मामले में अंतिम फैसला ट्रायल के दौरान साक्ष्यों और दलीलों के आधार पर होगा.

इधर, हेमंत सोरेन ने विशेष पीएमएलए अदालत में आरोप गठन की प्रक्रिया को चुनौती देते हुए झारखंड हाईकोर्ट का भी रुख किया था.

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बुधवार को हाईकोर्ट में भी उनकी याचिका पर सुनवाई हुई. हाईकोर्ट से उन्हें तत्काल राहत नहीं मिली और निचली अदालत की कार्यवाही आगे बढ़ने का रास्ता बना रहा. बड़गाईं जमीन मामले में आरोप गठन के साथ ही अब करीब तीन वर्ष पुराने इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर गई है. मामले में अदालत अब साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आगे की सुनवाई करेगी.

-भारत एक्सप्रेस



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