Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

Atiq Ahmed: जेल में बंद माफिया अतीक के बेटे अली को सता रहा है मौत का डर! हाईकोर्ट ने खारिज की सुरक्षा की मांग वाली याचिका

माफिया अतीक अहमद का बेटा अली अहमद नैनी सेंट्रल जेल में बंद हैं. उसने कोर्ट में पेशी के दौरान अपनी सुरक्षा को लेकर ख़तरा बताया था

अतीक और उसका बेटा अली (फोटो सोशल मीडिया)

Rakesh Kumar Edited by Rakesh Kumar

Atiq Ahmed Son Ali Ahmed: इलाहाबाद हाईकोर्ट से माफिया अतीक अहमद (Atiq Ahmed) के बेटे अली अहमद (Ali Ahmed) को तगड़ा झटका लगा है. अली अहमद के वकील की कोर्ट में मौजूदगी न होने के कारण अदालत ने सुरक्षा की मांग को लेकर दाखिल की गई याचिका को खारिज कर दिया है. अली ने कोर्ट से ये भी मांग की थी कि कोर्ट में पेशी के दौरान यूपी पुलिस की जगह पर केंद्रीय सुरक्षा बलों के द्वारा उसे ले जाया जाए.

बता दें कि माफिया अतीक अहमद के बेटे अली अहमद ने याचिका दाखिल करते हुए ये आशंका जताई थी कि कोर्ट में पेशी के दौरान उस पर जानलेवा हमला हो सकता है. इसको लेकर उसने मांग की थी कि या तो उसकी पूरी सुरक्षा की जाए या फिर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए उसकी पेशी हो. इसी के साथ ही याचिका में जेल से वारंट तामील कराने के दौरान सुरक्षा की मांग की गई थी. इसके अलावा अली ने सुरक्षा कारणों से जेल बदलने की मांग भी की थी. तो वहीं अली ने कोर्ट से ये भी मांग की थी कि, उसे जेल बदलने या पेशी पर ले जाते समय यूपी पुलिस के बजाय केंद्रीय सुरक्षा बलों को लगाया जाए. गौरतलब है कि बसपा विधायक राजू पाल की हत्या के अहम गवाह उमेश पाल की हत्या के मामले में पुलिस ने अली अहमद को भी आरोपी बनाया है.

ये भी पढ़ें- Ayodhya: रामलला के दर्शन के लिए अब जा सकेंगे प्‍लेन से, अयोध्‍या के एयरपोर्ट पर 30 दिसम्बर को उतरेगी पहली फ्लाइट

मालूम हो कि माफिया अतीक अहमद का बेटा अली अहमद नैनी सेंट्रल जेल में बंद हैं. उसने कोर्ट में पेशी के दौरान अपनी सुरक्षा को लेकर ख़तरा बताया था और इसी को लेकर उसने अपने अधिवक्ता के माध्यम से सुरक्षा की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. इसी के साथ ही तमाम मांगें भी रखी थी, लेकिन बुधवार को इस मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने माफिया के बेटे अली की याचिका खारिज कर दी और कहा कि, काल्पनिक आधार खतरा बताकर कोर्ट के द्वारा सुरक्षा के आदेश नहीं मिल सकते. इसी के साथ ही कोर्ट ने ये भी कहा कि, पेशी के दौरान सुरक्षा खतरे को लेकर कुछ विश्वसनीय सबूत भी होने चाहिए ताकि कोर्ट उस पर सरकार को समादेश जारी कर सके. यह कहते हुए जस्टिस विवेक कुमार बिड़ला और जस्टिस विनोद दिवाकर की डिवीजन बेंच ने याचिका को ख़ारिज कर दी है. तो वहीं सुनवाई के दौरान अली के अधिवक्ता भी मौजूद नहीं थे.

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital