केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने गुरुवार (24 जुलाई) को भारत की नई राष्ट्रीय सहकारी नीति (National Cooperative Policy) जारी की. यह हर गांव को शामिल करते हुए एक सहकारी व्यापार इकोसिस्टम के विकास को बढ़ावा देगी और 2047 तक विकसित होने की देश की सामूहिक महत्वाकांक्षा में योगदान देगी.
2002 में बनाई गई नीति की जगह नई नीति के पीछे का विचार सहकारी समितियों को पेशेवर और टिकाऊ आर्थिक संस्थाओं में बदलना है जो अगले 25 वर्षों में देश के सकल घरेलू उत्पाद में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि सहकारिता नीति बनाते समय इस बात का ध्यान रखा गया कि नीति में गांव और गांव की महिलाएं इसमें निहित हो.
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “सहकारिता नीति बनाते समय इस बात का ध्यान रखा गया कि नीति का केंद्र बिंदु लोग, गांव, कृषि, गांव की महिलाएं, दलित, आदिवासी हों… एक वाक्य में कहें तो इसका विज़न सहकारिता की समृद्धि के माध्यम से 2047 में एक विकसित भारत बनाना है. इसका मिशन पेशेवर, पारदर्शी, तकनीकी, जिम्मेदार और आर्थिक रूप से स्वतंत्र एवं सफल लघु सहकारी इकाइयां विकसित करना है. हम हर गांव में कम से कम एक सहकारी समिति बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं…”
भारत में दुनिया की एक-चौथाई से अधिक सहकारी समितियां हैं
आठ लाख से ज़्यादा सहकारी समितियों वाला भारत वर्तमान में दुनिया की एक-चौथाई से ज़्यादा सहकारी समितियां हैं. इसकी लगभग एक-तिहाई ग्रामीण आबादी अपनी विविध सामाजिक-आर्थिक ज़रूरतों के लिए सदस्यों के रूप में सीधे इन समितियों से जुड़ी हुई है.
करोड़ों लोगों को आर्थिक गतिविधियों में शामिल करने में इस क्षेत्र के महत्व पर ज़ोर देते हुए शाह ने कहा, “एक समय था जब लोग कहते थे कि सहकारिता का कोई भविष्य नहीं है. आज मैं कहता हूँ कि भविष्य सिर्फ़ सहकारिता का है.” उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय सहकारिता नीति का लक्ष्य 2034 तक सकल घरेलू उत्पाद में सहकारी क्षेत्र के योगदान को तीन गुना करना, 50 करोड़ सक्रिय सदस्यों को इसमें शामिल करना और युवाओं को रोज़गार के अवसरों से जोड़ना है.
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-भारत एक्सप्रेस
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