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IIT बॉम्बे के पूर्व छात्र सुधींद्र कुलकर्णी ने प्रोफेसर डूला का किया बचाव, बोले- SC/ST एक्ट के तहत दर्ज केस हो वापस

IIT बॉम्बे छात्र आत्महत्या पर सुधींद्र कुलकर्णी ने निष्पक्ष जांच, SC/ST एक्ट में सुधार और छात्रों‑फैकल्टी के तनाव कम करने की जरूरत पर जोर दिया.

Sudheendra Kulkarni's statement on the suicide.

आत्महत्या पर सुधींद्र कुलकर्णी का बयान

IIT बॉम्बे में छात्र आत्महत्या की घटना ने पूरे देश का ध्यान खींचा है. इस पर सामाजिक‑राजनीतिक कार्यकर्ता और लेखक सुधींद्र कुलकर्णी, जो खुद IIT बॉम्बे के पूर्व छात्र रहे हैं, ने कहा कि सबसे पहले इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. उनका मानना है कि असली कारणों को सामने लाना और जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराना बेहद जरूरी है.

प्रोफेसर पर कार्रवाई से पहले जांच

कुलकर्णी ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला का बचाव करते हुए कहा कि जब तक जांच में उनका दोष साबित न हो, तब तक उनके खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया जाना चाहिए. उन्होंने याद दिलाया कि प्रोफेसर डूला का शैक्षणिक रिकॉर्ड बेहतरीन रहा है और उन्हें कई पुरस्कार भी मिले हैं.

SC/ST एक्ट पर सवाल

उन्होंने यह भी कहा कि प्रोफेसर डूला के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत दर्ज केस वापस लिया जाना चाहिए. कुलकर्णी का तर्क है कि इस कानून का कई बार गलत इस्तेमाल हुआ है और इसे सुधारने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बहस जरूरी है.

उल्टा जातिवाद का मुद्दा

कुलकर्णी ने कहा कि अगर किसी छात्र की जाति SC या ST है तो तुरंत ऊंची जाति के लोगों को दोषी ठहराना गलत है. उन्होंने इसे “उल्टा जातिवाद” बताया और कहा कि आत्महत्या के पीछे अलग‑अलग कारण होते हैं, जिन्हें समझना जरूरी है.

कानून के दुरुपयोग पर बहस

उनका कहना है कि मीडिया रिपोर्ट्स में साफ दिखता है कि इस कानून का देशभर में बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हुआ है. इसलिए अब समय आ गया है कि इस पर गंभीर चर्चा हो और इसे बेहतर बनाने के लिए सुधार किए जाएं.

छात्रों के तनाव पर ध्यान

कुलकर्णी ने सुझाव दिया कि IITs और अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों को कैंपस लाइफ में सुधार करना चाहिए. खासकर हाशिए पर मौजूद समुदायों के छात्रों को अतिरिक्त कोचिंग और पीयर‑सपोर्ट जैसी सुविधाएं दी जानी चाहिए ताकि उनका तनाव कम हो सके.

फैकल्टी की कमी

उन्होंने बताया कि फैकल्टी भी भारी दबाव में है. नए IITs खुलने और छात्रों की संख्या बढ़ने के बावजूद फैकल्टी पदों की संख्या उतनी नहीं बढ़ी. जनवरी 2026 तक सभी IITs में करीब 38% पद खाली थे. IIT खड़गपुर में तो यह दर 51% तक पहुंच गई है.

फैकल्टी में डर का माहौल

कुलकर्णी ने चेतावनी दी कि अगर जिम्मेदार फैकल्टी मेंबर को सिर्फ नियमों का पालन करने पर सजा दी जाती है, तो इससे पूरे शिक्षण समुदाय में डर फैल जाएगा. उन्होंने कहा कि पहले से ही अच्छे शिक्षकों को भर्ती करना मुश्किल है, और अगर उन पर SC/ST एक्ट का खतरा मंडराता रहेगा तो विदेश से कोई भी प्रोफेसर भारत लौटकर IITs में पढ़ाना नहीं चाहेगा.

जातिवाद और सांप्रदायिकता का विरोध

कुलकर्णी ने जोर देकर कहा कि कैंपस और समाज दोनों को जातिवाद और सांप्रदायिकता का हर रूप में मुकाबला करना चाहिए. संस्थानों को ऐसा माहौल मिलना चाहिए जहां आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा मिले और अलग‑अलग विचारों का सम्मान हो. उन्होंने कहा कि कट्टरता को बढ़ावा देने वाली एक्टिविज़्म को रोकना जरूरी है, क्योंकि यह अक्सर राजनीतिक समर्थन के कारण मजबूत हो जाती है.

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सामाजिक एकता का संदेश

अंत में कुलकर्णी ने कहा कि जिस सामाजिक एकता, भाईचारे और सद्भाव की जरूरत पूरे देश में है, उसकी शुरुआत हमारे कैंपस से होनी चाहिए. उन्होंने छात्रों और शिक्षकों दोनों से अपील की कि वे मिलकर ऐसा वातावरण बनाएं जिसमें न्याय, सम्मान और देशभक्ति की भावना मजबूत हो.

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-भारत एक्सप्रेस



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