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Andhra Pradesh Minor Girl Rape: आंध्र प्रदेश में 15 साल की नाबालिग से 14 लोगों ने 2 सालों तक किया बलात्कार, पीड़िता 8 महीने की गर्भवती

एसपी रत्ना ने कहा कि इस बात की जांच की जाएगी कि लड़की की गर्भावस्था, का पता क्यों नहीं चला. पीड़ीता अभी अपने गर्भाव्स्था के आठवें महीने में है. पुलिस ने मामले के सिलसिले में एक नाबालिग सहित 17 लोगों को गिरफ्तार किया है.

Andhra Pradesh Minor Girl Rape: आंध्र प्रदेश में 15 वर्षीय लड़की के साथ दो साल में 14 लोगों ने बार-बार बलात्कार किया और अब उसे गर्भवती पाए जाने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है. जिला पुलिस अधीक्षक वी रत्ना ने मीडिया को बताया कि लड़की का पहली बार यौन उत्पीड़न तब हुआ था जब वह कक्षा 8 में थी, दो महीने पहले तक वह कक्षा 10 में पढ़ रही थी, लेकिन तब भी वह स्कूल जा रही थी.

अनुसूचित जाति (मडिगा) समुदाय से ताल्लुक रखने वाली लड़की को आरोपी द्वारा धमकाया और ब्लैकमेल किया गया. वह अपनी मां के साथ रह रही थी. एसपी रत्ना ने कहा कि इस बात की जांच की जाएगी कि लड़की की गर्भावस्था, का पता क्यों नहीं चला. पीड़ीता अभी अपने गर्भाव्स्था के आठवें महीने में है. पुलिस ने मामले के सिलसिले में एक नाबालिग सहित 17 लोगों को गिरफ्तार किया है.

लड़की के गर्भवती होने का पता चलने के बाद, उसकी मां ने जून के पहले सप्ताह में पुलिस के पास गई. 9 जून को पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया और उसके बाद 11 और लोगों को गिरफ्तार किया. पुलिस रिमांड रिपोर्ट में 17 आरोपियों के नाम हैं, 14 जिन्होंने कथित तौर पर लगभग दो साल तक उसके साथ बलात्कार किया और 3 ऐसे जिन्होंने अधिकारियों को सूचित नहीं किया, जिनमें नाबालिग क्लासमेट भी है, सभी को गिरफ्तार कर लिया गया है.

आरोपियों में 18-51 साल की उम्र के पुरुष शामिल

गिरफ्तार आरोपियों में तीन नाबालिग और 18 से 51 वर्ष की उम्र के 14 पुरुष शामिल हैं. उन पर भारतीय न्याय संहिता, यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं. पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि लड़की के कक्षा 10 के शिक्षकों ने उसकी अनुपस्थिति की रिपोर्ट क्यों नहीं की या उसने स्कूल जाना क्यों बंद कर दिया, इसकी जांच क्यों नहीं की.

एसपी रत्ना ने कहा, “यह एसएससी है, सबसे महत्वपूर्ण कक्षा. अगर कोई छात्रा कई दिनों तक क्लास में नहीं दिखती है, तो कोई भी शिक्षक उसे नोटिस कर सकता है और जांच कर सकता है. उसके शिक्षक ऐसा करने में विफल रहे.”

वहीं, डॉक्टरों ने उसकी डिलीवरी की तारीख 21 जुलाई के बाद तय की है, लेकिन पुलिस ने उसे अस्पताल में ही रखने का फैसला किया है क्योंकि उन्हें उसे वापस घर भेजना जोखिम भरा लगता है.

एक अधिकारी ने  बताया, “आरोपी, हालांकि वे जेल में हैं, पीड़िता को केस वापस लेने के लिए मजबूर करने के लिए कोई भी तरीका अपना सकते हैं. दलित होने के कारण, वह और उसकी मां कमजोर हैं और उन्हें मजबूर होना पड़ सकता है.”


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-भारत एक्सप्रेस



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