15 अगस्त को दिल्ली का लाल किला एक बार फिर देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव के रंग में रंगा नजर आएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करेंगे. इस साल के समारोह में खास तौर पर ‘वंदे मातरम’ की 150 साल पुरानी विरासत और 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प पर जोर रहेगा. समारोह की थीम में युवाओं की ऊर्जा, उनके सपनों और देश के भविष्य में उनकी भूमिका को खास जगह दी गई है.
एक तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है कि 2026 में भारत अपनी आजादी की 79वीं वर्षगांठ मना रहा है; 80वां स्वतंत्रता दिवस 2027 में होगा. हालांकि, इस वर्ष ‘वंदे मातरम’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने का अवसर जरूर है.
लाल किले पहुंचने पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह प्रधानमंत्री का स्वागत करेंगे. इसके बाद प्रधानमंत्री को दिल्ली एरिया के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल राजेश सेठी से मिलवाया जाएगा. जीओसी उन्हें ‘सैल्यूटिंग बेस’ तक ले जाएंगे, जहां इंटर-सर्विसेज और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टुकड़ी प्रधानमंत्री को जनरल सैल्यूट देगी.
इसके बाद प्रधानमंत्री गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण करेंगे. इस दस्ते में सेना, नौसेना, वायु सेना और दिल्ली पुलिस के अधिकारी और जवान शामिल होंगे. इस बार समारोह के लिए भारतीय सेना समन्वय की भूमिका निभा रही है. गार्ड ऑफ ऑनर की कमान लेफ्टिनेंट कर्नल अर्जुन सिंह के हाथों में होगी.
तिरंगे को दी जाएगी 21 तोपों की सलामी
गार्ड ऑफ ऑनर के बाद प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर की ओर बढ़ेंगे. वहां रक्षा मंत्री, रक्षा राज्य मंत्री, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और तीनों सेनाओं के प्रमुख उनका स्वागत करेंगे. इसके बाद प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे.
ध्वजारोहण के दौरान 1721 फील्ड बैटरी की ओर से स्वदेशी 105 मिमी लाइट फील्ड गन के जरिए 21 तोपों की सलामी दी जाएगी. कैप्टन सोनिया सिंह चौहान प्रधानमंत्री की ध्वजारोहण प्रक्रिया में सहायता करेंगी.
तिरंगा फहराए जाने के साथ राष्ट्रीय ध्वज गार्ड सलामी देगा. इसके बाद सेना का बैंड ‘वंदे मातरम’ की धुन बजाएगा और समारोह में मौजूद लोग राष्ट्रगीत के गायन में शामिल होंगे. इसके बाद राष्ट्रगान होगा.
आसमान से होगी फूलों की बारिश
ध्वजारोहण के समय भारतीय वायु सेना के दो एमआई-17 हेलीकॉप्टर लाल किले के ऊपर से फूलों की वर्षा करेंगे. इनमें से एक हेलीकॉप्टर राष्ट्रीय ध्वज और दूसरा ‘वंदे मातरम’ वाला ध्वज लेकर उड़ान भरेगा. यह दृश्य समारोह में मौजूद लोगों के लिए खास आकर्षण रहने वाला है.
फूलों की वर्षा के बाद प्रधानमंत्री देश को संबोधित करेंगे. उनके भाषण के समापन पर एनसीसी कैडेट और ‘माई भारत’ के स्वयंसेवक ‘वंदे मातरम’ का सामूहिक गायन करेंगे. इसके बाद राष्ट्रगान होगा.
2,500 युवा बनाएंगे ‘वंदे मातरम’ की आकृति
इस बार समारोह में युवाओं की भागीदारी भी खास रखी गई है. सेना, नौसेना और वायु सेना के कैडेटों के साथ ‘माई भारत’ के स्वयंसेवकों समेत करीब 2,500 लड़के और लड़कियां कार्यक्रम में शामिल होंगे. ये सभी लाल किले के सामने ज्ञानपथ पर बैठेंगे और सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम’ की आकृति बनाएंगे.
ज्ञानपथ पर ‘विकसित भारत 2047’ की थीम को दर्शाने वाले कट-आउट भी लगाए जाएंगे. इसका मकसद देश के भविष्य को लेकर युवाओं की भूमिका और उनकी आकांक्षाओं को समारोह के केंद्र में लाना है.
मेहमानों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम
लाल किले पर होने वाले इस कार्यक्रम को देखने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों से करीब 5,000 विशेष मेहमानों को आमंत्रित किया गया है. लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए छह स्थानों पर 25 क्लॉक रूम बनाए गए हैं, ताकि विजिटर्स को सामान रखने में परेशानी न हो.
इसके अलावा हेल्पडेस्क पर 200 स्वयंसेवक तैनात रहेंगे. इनमें 100 एनसीसी और 100 ‘माई भारत’ के स्वयंसेवक शामिल होंगे. ये स्वयंसेवक पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर लोगों को उनके निर्धारित एन्क्लोजर तक पहुंचने में मदद करेंगे. व्हीलचेयर की जरूरत वाले लोगों के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है. मेट्रो स्टेशनों और पार्किंग क्षेत्रों में एनसीसी कैडेट उनकी सहायता के लिए मौजूद रहेंगे.
स्वतंत्रता दिवस के दिन कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने के लिए दिल्ली मेट्रो की सेवाएं सुबह 4 बजे से शुरू हो जाएंगी. आमंत्रित लोगों के लिए मेट्रो यात्रा मुफ्त रहेगी. इसके लिए ई-निमंत्रण पत्र के साथ मेट्रो का क्यूआर कोड भी उपलब्ध कराया जा रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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