केंद्रीय गृह मंत्रालय ने लोकसभा में बताया कि जनगणना 2027 में होगी. इसका दो फेज होगा, पहले चरण में मकानों की गणना की जाएगी. इसके बाद दूसरे चरण की प्रक्रिया फरवरी 2027 से शरू होगी. कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के जनगणना पर सवाल पूछने के बाद गृह मंत्रलाय द्वारा इन तारीखों का पता चला है.
इससे पहले भी विपक्ष ने कई बार जनगणना को लेकर सरकार को घेरा है. 2023 में बिहार में हुए जातीय जनगणना के बाद भी देश में आबादी की गणना नहीं की जा रही है. इस मुद्दे को लेकर सड़क से संसद तक कई बार विपक्ष ने इसे उठाया है. जिसके बाद अब गृह मंत्रालय का जवाब आया है.
2026 से 2027 तक चलेगी गणना
गृह मंत्रलाय ने अपने जवाब में बताया है कि जनगणना की प्रक्रिया दो चरणों में की जाएगी. अप्रैल 2026 से सितंबर 2026 के बीच 30 दिनों के अंदर घरों की गणना की जाएगी. जिसके बाद इसका दूसरा फेज, जो कि आबादी की गणना का है, वो फरवरी 2027 को शुरू होगा. इसमें केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख, जम्मू-कश्मीर साथ ही पहाड़ी राज्य उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश शामिल नहीं होंगे. इन सबकी गणना सितंबर 2026 से अक्टूबर 2026 तक होगी.
मंत्रालय के मुताबिक 1 मार्च 2027 को रात 12 बजे पूरे देश में गिनती के लिए रेफरेंस डेट होगा. नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के एक सवाल के लिखित जवाब में विवरण देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि पहले चरण में आवास गणना और दूसरे चरण में आबादी की गणना की जाएगी.

राहुल गांधी के सवाल क्या थे ?
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गृह मंत्रलाय से तीन प्रमुख प्रश्न पूछे, जिनमें से जनगणना को लेकर पूछा गया सवाल यह है कि, “दशकीय जनगणना की तैयारी के लिए प्रमुख प्रक्रियात्मक कदमों का ब्यौरा और संभावित समयसीमा क्या है, जिसमें प्रश्रों की तौयारी, कार्यक्रम निर्धारित करना शामिल है.” इसके जवबा में गृह मंत्रलाय ने जनगणना के तारीखों का ऐलान करते हुए, इसकी प्रक्रिया बताई.
राहुल गांधी ने इन प्रश्नों को लेकर X पर पोस्ट लिखा, ” संसद में मैंने सरकार से जाति जनगणना पर सवाल पूछा – उनका जवाब चौंकाने वाला है. न ठोस रूपरेखा, न समयबद्ध योजना, न संसद में चर्चा, और न ही जनता से संवाद. दूसरे राज्यों की सफल जाति जनगणनाओं की रणनीति से सीखने की कोई इच्छा भी नहीं. मोदी सरकार की यह जाति जनगणना देश के बहुजनों के साथ खुला विश्वासघात है.”
संसद में मैंने सरकार से जाति जनगणना पर सवाल पूछा – उनका जवाब चौंकाने वाला है।
न ठोस रूपरेखा, न समयबद्ध योजना, न संसद में चर्चा, और न ही जनता से संवाद।
दूसरे राज्यों की सफल जाति जनगणनाओं की रणनीति से सीखने की कोई इच्छा भी नहीं।
मोदी सरकार की यह जाति जनगणना देश के बहुजनों के साथ… pic.twitter.com/UW1rxMJFVI
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) December 3, 2025
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2011 में हुई थी आखिरी बार जनगणना
बता दें कि, देश में दशकीय जनगणना की प्रक्रियां 1951 से चली आ रही है. पहली जनगणना सन 1951 में जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में हुई थी. उसके बाद आखिरी जनगणाना सन 2011 में हुई थी. हर दस साल में होने वाली इस गणना के मुताबिक 2021 में जनगणना होनी थी, पर कोविड महामारी के चलते जनगणना टालनी पड़ी, जिसके बाद अब 2027 में जनगणना कराने के लिए सरकार कह रही है.
-भारत एक्सप्रेस
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