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जयशंकर ने की ईरानी विदेश मंत्री से बात, इधर दूतावास पहुंचे विदेश सचिव; जंग के बीच क्या बदल रहा है भारत का रुख?

मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच भारत ने कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है. जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री से बात की और विदेश सचिव विक्रम मिस्री दूतावास पहुंचे. एक्सपर्ट्स इसे भारत की ‘बैक-चैनल डिप्लोमेसी’ और क्षेत्रीय तनाव कम कराने की कोशिश मान रहे हैं..

India Iran diplomacy Jaishankar call: मिडिल ईस्ट में ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध की आग फैल रही है, मिसाइलों की गड़गड़ाहट थमने का नाम नहीं ले रही और दुनिया दो धड़ों में बंटी नजर आ रही है. ऐसे तनावपूर्ण माहौल में भारत सरकार की ओर से कूटनीतिक कदम उठाए जा रहे हैं. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची से फोन पर बात की, जबकि विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने नई दिल्ली में ईरानी दूतावास पहुंचकर कंडोलेंस बुक पर हस्ताक्षर किए. जहां ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत पर संवेदना व्यक्त की गई. एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह महज औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत की विदेश नीति में बदलाव का संकेत हो सकता है.

जयशंकर ने की ईरानी विदेश मंत्री से बातचीत

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची से फोन पर चर्चा की, जिसकी जानकारी उन्होंने एक्स पर पोस्ट साझा करके दी. इस बातचीत में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय स्थिरता और युद्ध (Middle East War) की स्थिति पर विचार-विमर्श हुआ. जयशंकर ने ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत पर संवेदना व्यक्त की और शांति की अपील की.

एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह कॉल भारत की बैक-चैनल डिप्लोमेसी का हिस्सा हो सकती है, जहां भारत युद्ध को रोकने या कम करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है. भारत ने हमेशा तटस्थ रहने की नीति अपनाई है, लेकिन इस युद्ध में ईरान के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को देखते हुए यह कदम महत्वपूर्ण है.

विदेश सचिव का ईरानी दूतावास दौरा

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने नई दिल्ली में ईरानी दूतावास पहुंचकर कंडोलेंस बुक पर हस्ताक्षर किए. उन्होंने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत पर गहरी संवेदना व्यक्त की. यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों से तनाव चरम पर है. एक्सपर्ट्स इसे ‘स्ट्रेटेजिक मैसेजिंग’ कह रहे हैं.

बता दें कि मिस्री एक मंझे हुए राजनयिक हैं और उनका दौरा यह संकेत देता है कि भारत तनाव कम करने के लिए कोई गुप्त संदेश या प्रस्ताव साझा कर रहा है. यह कदम भारत की विदेश नीति में संतुलन बनाए रखने का प्रयास लगता है, जहां अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी है, लेकिन ईरान के साथ भी मजबूत आर्थिक रिश्ते हैं.

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जंग के बीच क्या बदल रहा भारत का स्टैंड?

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब भारत ने युद्ध (Iran Israel War) पर तटस्थ रुख अपनाया है. लेकिन जयशंकर की कॉल और मिस्री का दौरा बताता है कि भारत शांति दूत की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह ‘बैक-चैनल’ डिप्लोमेसी का हिस्सा हो सकता है, जहां बड़े नेता सीधे बात नहीं कर पाते तो पर्दे के पीछे संदेश भेजे जाते हैं.

दरअसल भारत का यह कदम क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देता है, क्योंकि ईरान के साथ चाबहार पोर्ट और तेल आयात जैसे महत्वपूर्ण रिश्ते हैं. हालांकि, अमेरिका के साथ QUAD और इंडो-पैसिफिक साझेदारी को देखते हुए भारत को संतुलन बनाना पड़ रहा है. यह कदम भारत की गुटनिरपेक्षता नीति को मजबूत करता नजर आ रहा है.

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-भारत एक्सप्रेस



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